मूलभूत सुविधाओं से जूझते राजस्थान के सबसे ऊंचे इस गांव में पहली बार होगा मतदान
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मूलभूत सुविधाओं से जूझते राजस्थान के सबसे ऊंचे इस गांव में पहली बार होगा मतदान

Rajasthan Election news: राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू के शेरगांव गुमनामी व अंधेरे के उन पन्नों में शामिल है जहां तक पहुंचने के लिए दिन में रोशनी की आवश्यकता है, रात के अंधेरे में इस गांव में पहुंचाना नामुमकिन है. 

मूलभूत सुविधाओं से जूझते राजस्थान के सबसे ऊंचे इस गांव में पहली बार होगा मतदान

Rajasthan Election: हम चंद्रमा और मंगल ग्रह पर जाने की बात कर रहे हैं, हम आसमान पर उड़ने और पानी पर चलने की बात कर रहे है लेकिन आज हम उस वास्तविकता से आपको अवगत करवा रहे हैं इसके बारे में सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी. सिरोही जिले में स्थित राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू के सबसे ऊंचे गांव शेरगांव व उतरज की हम बात कर रहे है. यह शेरगांव गुमनामी व अंधेरे के उन पन्नों में शामिल है जहां तक पहुंचने के लिए दिन में रोशनी की आवश्यकता है, रात के अंधेरे में इस गांव में पहुंचाना नामुमकिन है. 

पैंथर, भालू और अन्य जंगली जानवरों के डर से यहां के लोग सहमे व डरे हुए रहते हैं. शेरगांव में पहुंचने के लिए 17 किलोमीटर का पैदल लंबा सफर गुरु शिखर से तय करना पड़ता है. इस रास्ते में ना तो कोई सड़क है न जाने के लिए कोई साधन, चट्टानों पर रेंगते हुए पहाड़ों को पार करते हुए और नदियां नालों को पार करते हुए इन गांव में पहुंचना पड़ता है. गुरु शिखर से इन गांव में पहुंचने की पैदल यात्रा शुरू होती है, करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर पहला गांव उतरज आता है और उसके बाद दूसरा गांव शेरगांव. उतरज और शेरगांव के मध्य की दूरी करीब 12 किलोमीटर है. 

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कितनी सरकार आई और कितनी सरकार गई लेकिन इस गांव की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया. पहले शेरगांव के लोगों को मतदान करने के लिए 12 किलोमीटर दूर उतरज गांव आना पड़ता था जिसके लिए मतदाता पैदल चलकर कई घंटे के सफर के बाद उतरज गांव मतदान करने के लिए आते थे लेकिन निर्वाचन विभाग ने उनको हो रही इस असुविधा और शत प्रतिशत मतदान करवाने के संकल्प को लेकर शेरगॉव गांव में मतदान करवाने का निश्चय किया जिस पर निर्वाचन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने जाकर वहां की स्थिति देखी और एक मतदान केंद्र शेरगांव में बनाया. इस मतदान केंद्र पर 117 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. जब इस गांव के बारे में जी मीडिया की टीम ने सुना तो वहाँ जाने का फैसला किया और वहां के हालातो से रूबरू हुए. गुरुशिखर से जी मीडिया से हमारे संवाददाता साकेत गोयल ने शेरगांव के लिए 17 किलोमीटर की अपनी पैदल यात्रा शुरू की. 

पहाड़ों पर चलते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए हम पहले उतरज गांव पहुंचे. जब हमने यहां के हालात देखें तो, और लोगों से बातचीत की तो हमने पाया कि वहां के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जूझ रहे हैं इतना ही नहीं गांव में पैंथर और भालू का डर हमेशा लोगों को बना रहता है फिर भी जैसे तैसे लोग यहां पर अपना जीवन यापन कर रहे हैं पशुपालन और खेती यही इस गांव के लोगों की आय का साधन है. इस गांव में सुविधा के नाम पर केवल बिजली है और एक आठवीं तक का स्कूल . कुछ देर यहां रुकने के बाद फिर हम आगे बढ़े शेरगांव की तरफ अनेक नदी नाले और पहाड़ों को पार करके 17 किलोमीटर के करीब पैदल चलकर हम शेरगांव पहुंचे, हमने देखा यहां ना तो बिजली है ना सड़क थी और ना पानी की कोई खास सुविधा, संचार साधन के नाम पर भी यहां मोबाइलों में नेटवर्क नहीं था. 

इस गांव में ना तो कोई विद्यालय है और ना कोई अन्य साधन
फिर भी यहां के लोग इन विषम स्थितियों में जूझते हुए इस गांव में रह रहे है. इस गांव में रहने वाले बच्चे अपने रिश्तेदारों के यहां पढ़ने के लिए अन्य स्थानों पर चले जाते हैं क्योंकि इस शहर गांव में ना तो कोई विद्यालय है और ना ही पढ़ाई का कोई अन्य साधन. रात होते ही यह पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है. लेकिन निर्वाचन विभाग में इस बार कोशिश करते हुए इस गांव के 117 मतदाताओं के लिए मतदान केंद्र बनाने का निश्चय किया अब 117 मतदाताओं को मतदान करने के लिए यहां से 12 किलोमीटर दूर उतरज नहीं आना पड़ेगा. वरना पूर्व में चुनाव में यहां के बुजुर्ग मतदाताओं को मतदान के लिए एक दिन पूर्व ही शेरगांव से उतरज अपने भोजन के साथ यहां आना पड़ता था. इन गांव में ना कोई साइकिल का पहिया घूमता है ना कोई बाइक का और ना कार का, लेकिन यहाँ पहाड़ों पर चलते हैं तो अपने दो पांव जिनके सहारे यहां के लोग रह रहे हैं.

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अरावली की वादियों के बीच बसा शेरगांव शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर है. गुरु शिखर से 17 किलोमीटर दूर इस गांव में पहुंचने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं है. यहां पहुंचने कि लिए किसी प्रकार का कोई साधन भी नहीं है. शेर गांव में करीब 50 परिवार रहते हैं. यहां के लोगों का जीवन यापन पशुपालन से होता है. पहाड़ों में बनी गुफाओं में ग्रामीणों ने झोपड़ी बना रखी है. पूरा गांव यहीं पर एक परिवार की तरह रहता है. गांव को लेकर यह भी दावा किया जाता है कि करीब 400 साल पहले महाराणा प्रताप ने 2 साल तक यहां पर अज्ञात वास किया था. गांव से करीब 3 किलोमीटर आगे की तरफ एक महादेव मंदिर है. यहां पर एक गुफा है. बताया जाता है कि उस गुफा में महाराणा प्रताप 2 साल रुके थे. इस गांव में बिजली नहीं है. यहां के लोग सोलर लाइटर्स की रोशनी करके अपना जीवन यापन कर रहे हैं. यहां घने जंगल, पथरीले रास्तों से होकर भी गुजरना पड़ता है.

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में अधिक से अधिक वोटिंग हो सके इसके लिए चुनाव आयोग दूर दराज इलाकों में ढूंढ़ कर मतदान बूथ बना रही है. राजस्थान में पहली बार 1500 मीटर की ऊंचाई पर बूथ बनाया गया है. राजस्थान में यह पहला अवसर है जब मतदाताओं की सुविधा के लिए 1500 मीटर की ऊंचाई पर मतदान केंद्र स्थापित किया गया है. राजस्थान का सबसे ऊंचा पोलिंग स्टेशन माउंट आबू के शेरगांव में स्थापित किया गया है. यह गांव 1500 मीटर की ऊंचाई पर आबू पर्वत के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजस्थान जयपुर और जिला निर्वाचन अधिकारी जिला कलेक्टर सिरोही की पहल पर गांव शेरगांव में नया मतदान केंद्र संख्या बनाया गया है. इससे पूर्व शेरगांव की जनता को मतदान के लिए 12 किमी पगडंडी का रास्ता तय कर उतरज तक जाना पड़ता था. इस बूथ पर कुल 117 मतदाता हैं. चुनाव आयोग की इस पहल से स्थानीय जनता में खुशी की लहर है. जिला प्रशासन और चुनाव आयोग मतदान सफलता पूर्वक कराने में जुट गए हैं. 

शेरगांव में बनाया गया चुनाव बूथ 
जिला प्रशासन और चुनाव आयोग की पहल से पहली बार शेरगांव में चुनाव बूथ बनाया गया है. बूथ पर आवश्यक सुविधाओं के निरीक्षण के लिए रिर्टर्निंग अधिकारी सिद्धार्थ पालानीचामी ने अपनी टीम के साथ 17 किमी पैदल चलकर शेरगांव मतदान केंद्र पर पहुंचे. सभी ग्रामीणों को मतदान केंद्र की जानकारी दी गई. शेरगांव के लोगों का कहना है कि शायद पहली बार कोई अधिकारी इस गांव के अंदर उनकी सुध लेने आया है और यहां पर पहली पहली बार मतदान केंद्र बनाया है. अभाव में जूझते हुए इन ग्रामीणों के लिए यहां पर मतदान केंद्र बनाने की खुशी अपने आप में बहुत बड़ी खुशी है उनका कहना है कि अब उन्हें 12 किलोमीटर पैदल चलकर उतरज नहीं आना पड़ेगा बल्कि अपने गांव में ही मतदान करने का मौका मिलेगा.

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