श्रीगंगानगर: बॉर्डर पर BSF जवानों में भी दिवाली का उत्साह, ऐसे मनाया त्योहार

बॉर्डर के ये बहादुर यूं तो सीमा पर मुस्तेदी के साथ हर-पल हर-घड़ी चौकस रहते है, लेकिन दीपावली-होली जैसे बड़े त्यौहार पर इनकी निगांहे और चौकस हो जाती है.

श्रीगंगानगर: बॉर्डर पर BSF जवानों में भी दिवाली का उत्साह, ऐसे मनाया त्योहार

श्रीगंगानगर: दीपावली ऐसा पर्व जो सबके जीवन में खुशिया लाता है. सबको साथ रहकर खुशिया मनाने का मौका देता है, मगर अपनों से हजारो मिल दूर हमारे देश के जाबांज सीमा पर इस दिन भी पूरी मुस्तेदी के साथ डटे रहते है ताकि आपकी और हमारी खुशियो में खलल पैदा न हो. दीपावली के पर्व पर पूरे देश के लोग जब अपने-अपने परिवार के साथ खुशियों से झूम उठते हैं, तब हमारे जाबांज दुश्मन कि हरकतो पर निगाहें रखे हुए सीमा कि सुरक्षा में मुस्तेदी के साथ अपनी ड्यूटी करते है, ताकि दुशमन अपनी नापाक हरकत को अंजाम ना दे पाये. 

अपने घरो से हजारो किलोमीटर दूर ये जाबांज सीमा पर चौकसी के साथ ड्यूटी करते हुए एकजुट होकर जिस अंदाज में दीपावली मनाते है. उससे लगता नहीं कि उन्हें इस त्यौहार पर घर से दूर होने का एहसास होता होगा. वहीं देश की सीमा की सुरक्षा करने के साथ सीमा पर दीपावली मनाने का ये मौका पाकर बीएसएफ के जवान अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते है. जवानों के साथ महिला प्रहरी भी कंधे से कंधा मिलाकर चौकस निगाहों के साथ दुश्मन की हर हरकत पर नजर बनाये रखे है. महिला जवानों को भी दीपावली जैसे पर्व पर सीमा की ड्यूटी करके अपने आप पर गर्व महसूस होता है.

दिवाली-होली पर ज्यादा चौकन्ना रहते हैं जवान
बॉर्डर के ये बहादुर यूं तो सीमा पर मुस्तेदी के साथ हर-पल हर-घड़ी चौकस रहते है, लेकिन दीपावली-होली जैसे बड़े त्यौहार पर इनकी निगांहे और चौकस हो जाती है. दुश्मन कि पल-पल कि गतिविधियों पर नजर रखते हुए ये जाबांज हंसी-ख़ुशी के कुछ क्षण अपने लिए भी निकाल लेते है. ऐसा नहीं है कि दीपावली जैसे पावन पर्व पर अपने घर से दूर होने के कारण सीमा सुरक्षा बल के ये जाबांज खुशियों मे शामिल नहीं हो पाते है, बल्कि बटालियन में जिस तरह से दीपावली के पर्व कि मिलजुलकर खुशिया मनाई जाती है, इससे इन्हे कभी एहसास ही नहीं होता है कि वे अपनों से दूर है. करोड़ों भारतीयों की सीमा पर दुश्मन से सुरक्षा करते हुए ये अपने बटालियन के अधिकारियों व महिला प्रहरियो के साथ मिलकर ठीक उसी अंदाज में दीपावली कि खुशियों का आनंद उठाते है जैसे घर में परिवार के बड़े बुजुर्गो के साथ खुशियां मनाते हुए आनद उठाते है. 

रात के वक्त करते हैं लक्ष्मी पूजन
दिवाली के दिन सभी जवान अपनी ड्यूटी करते हैं और शाम को पूजन के समय सभी एक साथ मिलकर लक्ष्मी पूजा करते है. भजन-आरती का सिलसिला जो घंटो तक चलता रहता है. लक्ष्मी पूजन के साथ दीपोतस्व करके आपस में सभी एक साथ मिलकर अलग-अलग कार्यक्रम करते है. इसी प्रकार दीपावली के अगले दिन रामनवमी को भी मेल-मिलाप करते हुए पूजा पाठ के साथ भजन कीर्तन आरती का सिलसिला जारी रहता है. रात को तारबंदी पर अपनी ड्यूटी में पूरी तरह से मुस्तेद रहते हुए दुश्मन कि हर हरकत पर निगाहे रखते है. 

1965 से श्रीगंगा में बॉर्डर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं जवान
श्रीगंगानगर जिले की 210 किलोमीटर लंबी सरहदी सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी बीएसएफ को वर्ष 1965 में सौंपी गई थी, तब से बीएसएफ बिना थके-बिना हारे होली हो या दीपावली सर्दी हो या गर्मी यह जिम्मेदारी बखूबी निभाती आ रही है. यही कारण है कि देश के इन बहादुरों कि वजह से हर भारतीय अपने घर में सुरक्षित है. बॉर्डर के इन बहादुर जवानो के बिच सीमा पर आकर हर भारतीय अपने आप को गौरवानित महसूस करता है. देश के इन बहादुर जवानो के बिच आने पर दिल में देशभक्ति कि अलग ही उमंग नजर आती है. सीमा के आस-पास रहने वाले लोग भी इनके साथ दीपावली मनाकर मानो अपनी खुशियों को चार चांद लगा लेते है. 

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