Go First Airline: वित्तीय संकट में घिरी एयरलाइन गो फर्स्ट को पट्टे पर विमान मुहैया कराने वाली कंपनियां बुधवार को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) का फैसला आने के बाद अब अपने विमानों को वापस नहीं ले पाएंगी. पिछले कुछ दिन में किराये पर विमान देने वाली कंपनियों ने गो फर्स्ट से 45 विमानों को वापस लेने की मांग रखी थी. इसके लिए उन्होंने नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के पास इन विमानों का पंजीकरण खत्म करने का अनुरोध भी किया था.


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विमान को वापस लिए जाने से लगी रोक
आपको बता दें NCLT ने गो फर्स्ट के खिलाफ दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी देकर फिलहाल विमानों को वापस लिए जाने से रोक दिया है. एयरलाइन ने वित्तीय संकट का हवाला देकर खुद ही दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने की अर्जी लगाई थी.


NCLT ने दिया ये आदेश
गो फर्स्ट के दिवाला समाधान मामले से जुड़े रहे एक कानूनी जानकार ने कहा कि ऋण स्थगन लग जाने के बाद विमान मुहैया कराने वाली कंपनियां अब अपने विमानों को एयरलाइन से वापस नहीं ले पाएंगी. विमानन क्षेत्र के केपटाउन समझौते के मुताबिक, अगर पट्टे पर विमान देने वाली कंपनी अपने विमान का पंजीकरण खत्म करने का अनुरोध नियामक से करती है तो पांच कार्य दिवसों में उसपर अमल करना होता है, लेकिन एनसीएलटी का आदेश यह अवधि पूरा होने के पहले ही आ गया है.


54 विमान हुए थे बेड़े में शामिल
NCLT ने अपने आदेश में कहा है कि एयरलाइन के किसी भी कर्जदाता या विमान प्रदाता की तरफ से कंपनी को दी गई अपनी संपत्ति की वसूली को प्रतिबंधित किया जा रहा है. दो मई को कुल 54 विमान गो फर्स्ट के बेड़े में शामिल थे. हालांकि, इनमें से 28 विमान पी एंड डब्ल्यू कंपनी की तरफ से इंजनों की आपूर्ति नहीं किए जाने से खड़े थे और सिर्फ 26 विमानों का ही परिचालन हो पा रहा था.