IAS Manish Kumar Verma: भारतीय प्रशासनिक सेवा में अधिकारी बनना देश के युवाओं के लिए एक सपना है. आईपीएस, आईएएस या किसी अन्य सार्वजनिक डोमेन में अधिकारी बनने के लिए यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 8 लाख से ज्यादा उम्मीदवार उपस्थित होते हैं. एक आईएएस अधिकारी बनने और देश की सेवा करने के इच्छुक होने से यह एक आसान जर्नी नहीं है. एक आईएएस अधिकारी बनने के लिए, यह जरूरी है कि आप उन आईएएस अफसरों की सक्सेस स्टोरीज पढ़ें जो आपको सही दिशा दिखाने के लिए यूपीएससी परीक्षा पास करने में सफल हुए हैं.


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एक आईएएस अफसर बनने के बाद अलग अलग तरह की जिम्मेदारियां आ जाती हैं. अगर डीएम हैं तो पूरे जिले को संभालना पड़ता है. जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनना पड़ता है और उनका समाधान भी करना पड़ता है. आज हम एक ऐसे ही आईएएस अफसर मनीष कुमार वर्मा की स्टोरी बता रहे हैं जिन्होंने एक लेखपाल को काम में लापरवाही बरतने पर सस्पेंड कर दिया. 


2017 की यूपीएससी परीक्षा में मनीष कुमार की रैंक 61वीं थी. जब उन्होंने यूपीएससी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की तो वह ड्यूश बैंक नामक एक इनवेस्टमेंट बैंकिंग फर्म में थे. उन्होंने देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलोजी, कानपुर' से केमिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की थी. उन्होंने यूपीएससी परीक्षा के लिए अपनी तैयारी तब शुरू की जब वे एक वर्किंग प्रोफेशन थे. मनीष बचपन से ही एक होनहार स्टूडेंट रहे हैं और यह उनकी यूपीएससी की तैयारी में भी दिखा.


आईएएस मनीष कुमार वर्मा इस समय जौनपुर के डीएम हैं. वह जनता के बीच समस्याएं सुनने गए थे. उस दौरान एक मामला उनके सामने आया कि वहां के लेखपाल रितेश कुमार ने दो भाईयों को अलग अलग जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिए. इस पर डीएम ने तत्काल प्रभाव से लेखपाल को सस्पेंड कर दिया. इसके साथ ही उन्होंने सभी लेखपालों को निर्देश दिया कि पंचायत भवन में रोस्टर के मुताबिक जरूर बैठें.


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