Cheque Signature Mismatch: जब हम अपने बैंक अकाउंट से पैसा निकालने के लिए बैंक जाते हैं और अपने ही अकाउंट का चेक देते हैं तो बैंक में कैशियर चेक के पीछे साइन कराता है. जबकि चेक के बैक साइड में तो उसके लिए जगह भी नहीं होती है. इसके पीछे का राज क्या है आज हम आपको विस्तार से बताते हैं.


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मान लीजिए की कोई खाताधारक बैंक से अपने पैसे निकालने के लिए अपना चेक जमा कर देता है, कैशियर उसे पैसे दे देता है. वो घर चला जाता है. मतलब काम खत्म हो गया. पैसे निकालने आया था पैसा निकालकर चला गया. अब इसके दूसरे पहलू पर नजर डालते हैं. क्या होगा, जब थोडे ही देर मे वही आदमी कैशयर से कहता है की मेरा टोकन खो हो गया, आप मुझे पैसे दे दीजिए.


अब कैशियर के पास तो पैसे देने का कोई सबूत नहीं है. ऐसी स्थिति मे चेक के पीछे किए हुए साइम काम मे आते हैं. ये मात्र नियमो के मुताबिक बनाई गई एक सुरक्षा व्यवस्था है. 


यह इसलिए भी किया जाता है की टोकन लेने के बाद अगर सच में वो उसे खो देता है, और कोई गैर आदमी पैसे लेने बैंक मे आता है, तो वो सही साइन कर नही पाएगा और पकड़ा जाएगा.


जब बेअरर चेक से पैसे लेने वाला बाद में पैसे मिलने से इनकार करता है, तब ये साइन सच सामने ला सकते है. आपको याद होगा की बेअरर चेक से बड़ी रकम निकलने वाले के साइन उसके पैन कार्ड से मिलाने के बाद ही कैशियर उसे पैसे दे देता है, साथ मे उसका पैन नंबर भी लिख लेता है. बैंक ये सारे काम केवल आपके पैसों की सुरक्षा के लिए ही करती है.


इस बात का ध्यान रखें कि बैंक में चेक का एक निश्चित समय होता है. मान लीजिए किसी चेक की वैधता 6 महीने है. अगर आपने आज की तारीख डालकर किसी को चेक दे दिया है और वह उस चेक को 6 महीने से ज्यादा समय के बाद बैंक से कैश कराने जाता है तो वह चेक काम नहीं करेगा.


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