Jaya Bachchan Film: अमिताभ बच्चन सदी के सितारे हैं. उनकी सफलता का राज यही कि वह काम को छोटा या बड़ा नहीं समझते. वह चाहे जितना छोटा रोल करें, मगर उसमें भी अपनी जान लगा देते हैं. करियर के शुरुआती दिनों में उन्होंने जया बच्चन की एक फिल्म में इतना छोटा रोल किया कि आज उसे देख कर विश्वास नहीं होता. फिल्म थी पिया का घर. अमिताभ इस फिल्म के आखिरी गाने बंबई शहर की तुझको चल सैर करा दूं... में सिर्फ कुछ सेकंड्स के लिए दिखाई दिए थे. गाने में उन्हें फिल्म के लीड एक्टर्स, जया तथा अनिल धवन को एक रेस्तरां में कोल्ड ड्रिंक सर्व करते हुए दिखाया गया था. उन्हें इस तरह से गेटअप दिया गया था कि आपके लिए उन्हें पहचानना मुश्किल होगा. गौर से देखने पर अपको समझ आएगा कि अमिताभ बच्चन कुछ पल के लिए नजर आए हैं.


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इसलिए गेस्ट अपीयरेंस
1972 में जब यह फिल्म रिलीज हुई, उस समय अमिताभ बच्चन इंडस्ट्री में एक जाना पहचाना नाम थे. उनकी कई फिल्में रिलीज हो चुकी थी तथा आंनद (1971) से उन्हें लोग जानने लगे थे. जया बच्चन की भी तब तक लगभग दो दर्जन फिल्में रिलीज हो चुकी थीं. गुड्डी, उपहार, जवानी दीवानी जैसी फिल्मों से वह अपने अभिनय का लोहा मनवा चुकी थीं. ऐसे में उन्हें अमिताभ के सपोर्ट की क्यों जरूरत होती? दोनों ही अपने-अपने स्तर पर अपना-अपना काम बखूबी कर रहे थे. लेकिन यहां बात एक-दूसरे को जमाने की नहीं बल्कि प्यार की थी. दोनों का उस समय अफेयर चल रहा था, शादी नहीं हुई थी. ऐसे में एक-दूसरे का थोड़ा-बहुत साथ पाने के लिए अमिताभ ने इस फिल्म में गेस्ट अपीयरेंस किया.


ये है मुंबई मेरी जान
पिया का घर बासु चटर्जी द्वारा निर्देशित फिल्म थी. जया बच्चन के साथ अनिल धवन तथा पेंटल की फिल्म में मुख्य भूमिका थी. ताराचंद बड़जात्या ने फिल्म को प्रोड्यूस किया था. यह फिल्म 1970 में आई मराठी फिल्म मुंबई चा जावई का रीमेक थी. फिल्म मुंबई जैसे बड़े शहर का हाल बताती है, जहां न तो नए शादीशुदा जोड़े के लिए साथ बिताने के लिए घर में जगह है और न बाहर. गांव के एक बड़े-से घर में रहने वाली लड़की मालती (जया बच्चन) जब शादी होकर मुंबई में आती है तो मुंबई की एक अलग ही दुनिया देखकर दंग रह जाती है. यहां उसे छोटे-से किचन और एक छोटे से कमरे वाले घर में पति के संयुक्त परिवार के साथ रहना है, जिसमें सास ससुर, जेठ-जेठानी तथा एक देवर भी है. वह अपने आप को महानगरीय ढांचे में ढालने की जी-तोड़ कोशिश करती है लेकिन क्या इसमें सफल हो पाती है? बसु चटर्जी ने बड़ी ही संजीदगी से यह फिल्म बनाई थी. आज भी फिल्म ही नहीं, इसके गाने भी तरोताजा नजर आते हैं.


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