Knowledge Section: आज भी कभी जब टाइटेनिक (Titanic) का जिक्र होता है, तो हमेशा उसके एक्सीडेंट से जुड़ी बात जरूर की जाती है. अक्सर लोग यह सोचते हैं कि जिस वक्त टाइटेनिक डूबा होगा, उस वक्त का मंजर कैसा होगा. दरअसल, उस भयावह रात में हुआ टाइटेनिक का एक्सिडंट इतना खतरनाक था कि उसके मलबे को ढूंढ़ने में करीब 75 साल का समय लग गया था. अब तक दुनिया भर के वैज्ञानिकों द्वारा इस हादसे को लेकर काफी रिसर्च की जा चुकी है, लेकिन अब भी कुछ ऐसे रहस्य हैं, जो आज भी अटलांटिक महासागर में दफन हैं, जिनसे पर्दा उठना अभी बाकी है.


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आज से करीब 110 साल पहले 16 अप्रैल 1912 की रात में टाइटेनिक के साथ हादसा हुआ था, जिसमें वो एक हिमखंड से जा टकराया था. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, उस समय टाइटेनिक लगभग 41 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से ट्रैवल कर रहा था. वो इंग्लैंड के साउथेम्प्टन से अमेरिका के न्यूयार्क की ओर जा रहा था. 16 अप्रैल की रात जब जहाज में सभी यात्री सो रहे थे, ठीक उसी वक्त टाइटेनिक एक हिमखंड से जा टकराया और यह भयानक हादसा हो गया. इस हादसे में करीब 1500 से अधिक यात्रियों की मृत्यु हो गई थी. बता दें कि, यह हादसा अटलांटिक महासागर में हुआ था. टाइटेनिक को लेकर एक बात कही जाती थी कि यह विश्व का ना डूबने वाला जहाज था, लेकिन वह अपनी पहली यात्रा के दौरान ही डूब गया था.


आइये आज हम आपको टाइटेनिक से जुड़े कुछ ऐसे रहस्य बताते हैं, जिनसे आज भी पर्दा नहीं उठ सका है.


1. आखिर कैसे डूबा विश्व का ना डूबने वाला जहाज?
विश्व के सबसे विशाल जहाज टाइटेनिक को लेकर एक बात कही जाती थी की वो कभी ना डूबने वला जहाज था. हालांकि, एक्सपर्ट के आधार पर तैयार की गई बीबीसी की एक रिपोर्ट में यह बताया गया है कि टाइटेनिक को बनाते वक्त उसमें कुछ खास तरह के कंपार्टमेंट बनाए गए थे, जिससे की अगर किसी भी कारण से जहाज का एक हिस्सा डूब जाता है, तब भी उसका एक हिस्सा डूबने से बच जाएगा. हालांकि, इस लिहाज से जहाज को डिजाइन किए जाने के बावजूद वो कैसे डूबा, इसका पता आज तक वैज्ञानिक नहीं लगा पाए हैं. कई थ्योरी कहती हैं कि जहाज के मुख्य हिस्से में आधी लंबाई तक सुराख होने के कारण ही टाइटेनिक को डूबने से नहीं बचाया जा सका था.  


2. क्या ब्लू बैंड के कारण गई हजारों लोगों की जान?
रिपोर्टेस के अनुसार, अटलांटिक महासागर में अधिक स्पीड में जहाज चलने पर सम्मान दिया जाता है, जिसमें एक ब्ल्यू बैंड मिलता है. कई रिपोर्टेस इस बात का दावा करते हैं कि, टाइटेनिक भी इसी सम्मान का हकदार था, जिस कारण ब्लू बैंड को प्राप्त करने के लिए अटलांटिक में उसकी स्पीड बढ़ाई गई थी. टाइटेनिक साउथेम्प्टन से न्यूयार्क तक अपनी पहली यात्रा के लिए ही निकला था, जिसे वो पूरी भी ना कर सका. ऐसे में टाइटेनिक की स्पीड पर भी सवाल उठाए जाते हैं. 


3. लोगों की मौत को लेकर बताई जाती है यह वजह?
कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि अटलांटिक में हुए उस भयावह हादसे में करीब 1500 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई थी. इतने लोगो की मृत्यु का एक मुख्य कारण उस दौरान लाइफ बोट की संख्या के कम होने और यात्रियों के लिए की गई सुरक्षा व्यवस्था भी थी. ऐसे में अब भी इतने लोगों की मौत को लेकर उठाए जाने वाले सवालों के जवाब जानने बाकी हैं. 


4. क्या टाइटेनिक की स्पीड बनी एक्सीडेंट की वजह? 
टाइटेनिक के कैप्टन स्मिथ के ऊपर भी यह इल्जाम लगाए गए थे कि वे अटलांटिक को जल्द से ज्ल्द से क्रॉस करना चाहते थे, जिस कारण वे तेज स्पीड से जहाज को लेकर जा रहे थे. वहीं, कई रिपोर्ट्स में यह बताया गया है कि कैप्टन स्मिथ ने जहाज की स्पीड इसलिए तेज की थी, क्योंकि वे कोयले को जल्द से जल्द खत्म करना चाहते थे. ऐसे में अक्सर टाइटेनिक की स्पीड पर भी कई तरह के सवाल उठाए जाते रहे हैं.    


5. दो टुकड़ों में कैसे टूटा टाइटेनिक?
टाइटेनिक के दो टुकड़े हो जाना अपने आप में ही काफी हैरान करने वाला विषय है. इसलिए आज तक दुनिया भर के कई विशेषज्ञ इस बात का पता नहीं लगा पाए कि आखिर टाइटेनिक के दो टुकड़े किस कारण से हुए.


6. क्या दूरबीन होती तो टल जाता हादसा? 
टाइटेनिक के एक्सीडेंट को लेकर एक अहम वजह क्रू के पास दूरबीन के ना होने को भी बताया गया है. यह सवाल अक्सर उठाया जाता है कि टाइटेनिक जैसे विशाल जहाज के क्रू मेंबर्स और कैप्टन के पास दूरबीन क्यों नहीं थी. कई रिपोर्ट्स में इस बात जिक्र किया गया है कि अगर क्रू के पास दूरबीन होती तो वे काफी पहले ही खतरे को भाप लेते, जिससे इतना बड़ा हादसा होने से टल जाता और हजारों लोगों की जान भी बच जाती. 


बता दें कि ऐसे ही कई रहस्य है जिनके राज खुलने अभी बाकी हैं.