IAS Vandana Chauhan Success Story: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवार आईएएस, आईपीएस व अन्य प्रशासनिक पदों पर नौकरी पाने के लिए कई सालों तक इस परीक्षा की तैयारी करते हैं. भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में से एक सिविल सेवा परीक्षा को पास करने के बाद उम्मीदवार इंटरव्यू की ओर बढ़ते हैं. वहीं, इस परीक्षा को पास कर चुके उम्मीदवारों की सक्सेस स्टोरी हमें बताती है कि दृण निश्चय से की गई तैयारी हमें हमेशा फल देती है.


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आज हम आपको एक ऐसी ही उम्मीदवार आईएएस ऑफिसर वंदना सिंह चौहान की सफलता के बारे में बताएंगे, जिनकी सक्सेस स्टोरी कई अन्य लोगों की तरह ही काफी प्रेरणादायक है. अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए वंदना सिंह चौहान को अपने परिवार से विद्रोह करना पड़ा था. उन्होंने एक आईएएस अधिकारी के रूप में अपनी नियुक्ति के जरिए यह साबित कर दिया था कि अगर आप कड़ी मेहनत करते हैं, तो आप कोई भी लक्ष्य हासिल कर सकते हैं.


वंदना सिंह चौहान हरियाणा के नसरुल्लागढ़ गांव की रहने वाली थीं, जहां कोई उपयुक्त स्कूल नहीं था. उसके पिता ने इस वजह से उसके भाई को विदेश में पढ़ने के लिए भेज दिया. यह देख कर वंदना ने पढ़ाई करने का इरादा जताया. इसके बाद, वंदना को मुरादाबाद गुरुकुल में एडमिशन मिल गया.


परिवार के सदस्यों से, वंदना और उसके पिता को बहुत अधिक प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा. 12वीं कक्षा के बाद, वंदना ने घर पर रहते हुए यूपीएससी परीक्षा के लिए तैयारी करनी शुरू कर दी. उन्होंने एक आईएएस अधिकारी के रूप में काम करने की अपनी इच्छा को बेहद गंभीरता से लिया.


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वंदना सिंह हर दिन 12 से 14 घंटे पढ़ाई में बिताती थीं. वंदना सिंह ने कन्या गुरुकुल, भिवानी से संस्कृत (ऑनर्स) में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की और फिर एलएलबी (LLB) की पढ़ाई बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा से की. हालांकि, परिवार के सपोर्ट की कमी के कारण उन्हें अपना कोर्स ऑनलाइन करने के लिए मजबूर होना पड़ा. 


जबकि इस दौरान वंदना का भाई उनके साथ था और उन्होंने वंदना को पूरा समर्थन दिया. साल 2012 में हिंदी में आयोजित यूपीएससी परीक्षा में, वंदना सिंह चौहान को ऑल इंडिया 8वीं रैंक प्राप्त हुई.


इसके बाद वह कई ग्रामीण लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गईं, जो अंग्रेजी मीडियन के स्कूलों में जाने में असमर्थ थीं. वंदना अब अल्मोडा जिले की डीएम के पद पर कार्यरत हैं. पिछले साल डीएम के रूप में उनकी नियुक्ति को मान्यता देते हुए उन्हें कलक्ट्रेट में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था. वह तुरंत निर्णय लेने और बिना देरी किए कार्य करने के लिए प्रसिद्ध हैं, जिससे वह हमारे देश की अब तक की सबसे सक्रिय लोक सेवकों में से एक बन गई हैं.