Kader Khan Life Story: एक्टिंग, कॉमेडी और डायलॉग राइटिंग में अलग पहचान रखने वाले कादर खान का बचपन मुंबई के सबसे बदनाम इलाके कमाठीपुरा में बीता था. इसके बावजूद कादर खान भटके नहीं. अपने लिए नाम कमाया. कादर खान का जन्म अफगानिस्तान में हुआ था. जन्म के बाद माता-पिता उन्हें लेकर मुंबई आ गए थे. वे बेहद गरीब थे और कमाठीपुरा जैसे बदनाम इलाके में रहने लगे. यहां कादर खान ने शराब बनने से लेकर वेश्यावृत्ति और मर्डर तक तमाम इंसानी रंग देखें. उनकी मां उन्हें बस एक बात समझाती थी, बेटा पढ़. कादर खान खूब बढ़ते थे. कम लोग जानते हैं कि उनका शुरुआती करियर टीचर का था. वह मुंबई के एक कॉलेज में इंजीनियरिंग के प्रोफेसर थे. लेकिन साहित्य और उर्दू भाषा की तरफ उनका बहुत झुकाव था. महान लेखकों को पढ़ते हुए वह बुरी संगत से बचे रहे.


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नाटकों से शुरुआत
कादर खान को रंगमंच का शौक था. वह अभिनय करते थे और साथ ही नाटक लिखते थे. यहीं से उनके लिए सिनेमा की दुनिया के दरवाजे खुले. 1972 में आई रणधीर कपूर और जया बच्चन की फिल्म जवानी दीवानी में उन्हें सबसे पहले डायलॉग राइटिंग का काम मिला. जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. 


मनमोहन देसाई से मुलाकात
राइटिंग के सिलसिले में कादर खान की मुलाकात निर्माता-निर्देशक मनमोहन देसाई से हुई. वह मुंहफट इंसान थे. उन्होंने कादर खान से कहा, पहले मैं तुम्हारा काम देखूंगा. अगर पसंद आया तो आगे काम दूंगा वरना गटर में फेंक दूंगा. कुछ दिनों बाद जब कादर खान कुछ चीजें लिखकर पहुंचे तो मनमोहन देसाई कुछ बुदबुदाए. यह देखकर कादर खान ने उनसे कहा कि आप गाली दे रहे हैं. बात सच थी. मनमोहन देसाई ने पूछा तुम्हें कैसे पता चला. तब कादर खान बोले कि मैं होंठ पढ़ना जानता हूं. बाद में मनमोहन देसाई ने कादर खान को अपनी फिल्म नसीब में ऐसे व्यक्ति का रोल दिया, जो होंठों को पढ़ लेता है.


25 हजार का सवा लाख
खैर, कादर खान जो काम करके ले गए थे, उससे मनमोहन देसाई इतने खुश हुए कि उनकी फीस पूछी. कादर खान ने कहा कि पिछली फिल्म में 25 हजार रुपये मिले थे. मनमोहन देसाई ने उन्हें सवा लाख रुपये का चेक दिया. साथ ही घर में अंदर जाकर एक पोर्टेबल टीवी और एक सोने का ब्रेसलेट अलग से तोहफे में दिया.


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