पटनाः एक तरफ 21वीं सदी की इस डिजिटल दुनिया में हम चांद पर जाने की बात कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ बिहार के कई गांव अब भी सड़क को मोहताज हैं. बिहार में अब भी ऐसे गांव हैं जिसपर जनप्रतिनिधियों व सरकार की नजर नहीं पड़ी. ऐसा एक गांव है भागलपुर का लकरा गांव. भागलपुर के गोराडीह प्रखंड के सारठ डहरपुर पंचायत का लकरा गांव अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. दरअसल मुख्य सड़क से गांव पहुंचने के लिए एक अदद पक्की सड़क तक नहीं है.


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25 घरों में बस एक घर पक्का
खेत की पगडंडियों के सहारे एक किलोमीटर तक पैदल सफर तय करना पड़ता है, बीमार पड़ने पर चार लोग चारपाई पर लेकर डॉक्टर के पास जाते हैं. गांव में पीने के पानी के इंतजाम नहीं है, लड़के-लड़कियों की शादियों के लिए रिश्ते नहीं आ रहे हैं, शादियां करवाने के लिए कई परेशानियों से होकर गुजरना पड़ता है. लिहाजा इस गांव में 127 घरों में से अब महज 25 घर बचे हुए हैं. मूलभूत सुविधाओं के अभाव में लोग गांव से पलायन कर अपने रिश्तेदार या फिर दूसरे गांव में जमीन लेकर बस चुके हैं. 25 घरों में से एक घर पक्का का है बाकी 24 फूस के हैं. यहां के लोग अपने पुरखों के बनाए घरों को 1990 से 2021 तक छोड़ चुके हैं. गांव में अच्छी सुविधा के नाम पर सिर्फ बिजली है अन्य सुविधा की बात करें तो लोगों का बनाया हुआ ही एक कुआं, दो चापाकल है जिससे लोग पानी पीते हैं. 1970 में स्थापित एक स्कूल है और एक जर्जर सामुदायिक भवन है.


25 साल से बुरे हैं हालात
जनप्रतिनिधियों का इस गांव की ओर कोई ध्यान नहीं है. विकास के नाम पर सिर्फ और सिर्फ बिजली ही पहुंच सकी है. गांव के बारे में जानने के बाद बेटे-बेटियों की शादियां नहीं होतीं. कई शादियां लगने के बाद टूट जाती हैं. ग्रामीण सुरेश मंडल ने बताया कि गांव में सड़क, पानी समेत कोई भी सुविधा नहीं है. हर वर्ष यहां गंगा के जलस्तर बढ़ने के बाद बाढ़ से भी जूझना पड़ता है. लड़के वाले रिश्ते नहीं देते कहते हैं सड़क नहीं है वहां कुछ भी नहीं है.
फूलन देवी ने बताया कि कोई सुविधा इस गांव में नहीं है. गांव में किसी को सरकारी नौकरी तक नहीं है. सभी लोग मजदूरी करके कमाते हैं. गांव से बाहर खेत होकर ही जाना पड़ता है यहां 25 साल से है तब से ऐसा ही देख रहे हैं.


गांव में हो चुका है पलायन
इस गांव से अब तक कई परिवार अपना घर छोड़कर तो कई परिवार घर बेचकर पलायन कर चुके हैं. गांव छोड़ चुके लोग भागलपुर के धनकुंड ,नवादा ,जगदीशपुर, रतनगंज,सजोर और रजौन में जाकर बस गए.
लकरा के राजू मंडल अब रजौन के भाटकोरमा में रहने लगे. 20 साल पहले लकड़ा को छोड़कर परिवार के साथ चले गए. यहाँ कुछ जमीन बचा है उसे ही देखने आते हैं. उनका कहना है गांव में सड़क और कोई सुविधा नहीं रहने के कारण गांव छोड़कर जाना पड़ा.


रिपोर्ट: अश्वनी कुमार


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