गोपालगंज: बिहार के गोपालगंज में ऐतिहासिक थावे दुर्गा मंदिर में दर्शन करने आये श्रद्धालुओं की जहां सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. वहीं, थावे मां भवानी के दरबार में शारदीय नवरात्र के पहले दिन से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी हुई है. वैसे यहां सालों भर भक्तों की कतार लगी रहती है, लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्र में पूजा करने का ज्यादा महत्व है.


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मान्यता है कि जिला मुख्यालय से छह किलोमीटर दूर स्थित थावे भवानी मंदिर में जो श्रद्धालु सच्चे मन से मां की पूजा अर्चना करते हैं, उनकी मनोकामनाए पूरी होती है. जानकारों के मुताबिक, इस मंदिर के स्थापना की रोचक कहानी है.


इस जगह पर कभी घमंडी राजा मनन सिंह का राज्य था. इसी राज्य में मां भवानी के महान भक्त रहशु भगत जंगल में रहकर खेती-बारी करता था. दिन भर मां भवानी की आराधना में भी लगा रहता था. मान्यताओं के मुताबिक, मां का यह भक्त बाघ के गले में विषैले सांप की रस्सी बनाकर धान की दवरी करता था. रहशु भगत के इन कारनामें की चर्चा जैसे ही राजा मनन सिंह को लगी, उन्होंने मां के इस भक्त को गिरफ्तार करने का आदेश दे दिया.


बंदी बने रहशु से राजा ने मां भवानी को बुलाने का आदेश दिया. रहशु भगत ने मां की पूजा अर्चना शुरू कर दी. भक्त के आह्वाहन पर चारों तरफ काले बादल छा गए. हर तरफ तेज आंधी पानी होने लगा. मां के परम भक्त रहशु भगत के आह्वाहन पर देवी मां कामरू कामख्या से चलकर पटना के पटन और सारण के आमी होते हुए गोपालगंज के थावे पहुंची. मां के प्रकट होते ही रहशु भगत का सिर फट गया और मां भवानी का हाथ सामने प्रकट हुआ. मां के प्रकटट होने पर रहशु भगत को जहां मोक्ष की प्राप्ति हुई. वहीं मां के प्रकाश से घमंडी राजा मनन सिंह का सबकुछ खत्म हो गया.


यूपी और बिहार के अलावा नेपाल, बंगाल और झारखंड से भी लोगों का आने का सिलसिला लगा रहता है. यहां नवरात्र में पशु बलि देने की भी परम्परा है. लोग मां के दरबार में खाली हाथ आते हैं, लेकिन मां के आशीर्वाद से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. 


वहीं, श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन के द्वारा यहां व्यापक व्यवस्था की जाती है. यहां किसी को परेशानी न हो इसके लिए यात्री शेड बनवाया गया है. पीने के पानी की विशेष व्यवस्था की गई है. श्रद्धालुओं के लिए शौचालय का निर्माण कराया गया है.