Pappu Yadav: इसी साल 20 मार्च को पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया था. नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पप्पू यादव अपने बेटे सार्थक रंजन के साथ कांग्रेस में शामिल हुए थे और पार्टी के विलय का ऐलान किया था. लेकिन पप्पू यादव ने कांग्रेस पार्टी में शामिल होने की पूरी प्रक्रिया को फॉलो नहीं किया. नियमानुसार, पप्पू यादव को नई दिल्ली में फोटो शोआफ के बाद पटना में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में जाकर सदस्यता फॉर्म भरना चाहिए था और औपचारिक रूप से कांग्रेस सदस्य बनना था लेकिन पप्पू यादव ने यह सब नहीं किया. 


COMMERCIAL BREAK
SCROLL TO CONTINUE READING

अब सवाल यह उठता है कि क्या पप्पू यादव, लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव के पैंतरे को भांप चुके थे. वे नई दिल्ली में पवन खेड़ा की मौजूदगी में पार्टी में शामिल होने का ऐलान करने के बाद पूर्णिया चले गए. उसके बाद से वे लगातार पूर्णिया से टिकट के लिए बयान देते रहे. शुरुआत में कांग्रेस ने भी पप्पू यादव के लिए पूर्णिया सीट की जिद की लेकिन लालू प्रसाद यादव के आगे कांग्रेस की एक न चली और पूर्णिया सीट पर राजद ने बीमा भारती को मैदान में उतार दिया. 


थक हारकर पप्पू यादव ने निर्दलीय के रूप में पूर्णिया से परचा दाखिल कर दिया. अब कांग्रेस की ओर से कहा जा रहा है कि पप्पू यादव कांग्रेस में शामिल हुए ही नहीं थे और न ही सदस्यता ग्रहण की थी. इसलिए पप्पू यादव की उम्मीदवारी से कांग्रेस का कोई लेना देना नहीं है. अब सवाल यह पैदा होता है कि क्या पप्पू यादव को पहले से पता था कि उनके साथ खेला होने वाला है.


कांग्रेस में शामिल होने से एक दिन पहले पप्पू यादव ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की थी. इस दौरान तेजस्वी यादव भी मौजूद रहे थे. बाद में पप्पू यादव ने इस मुलाकात की तस्वीर शेयर करते हुए कहा था कि लालू प्रसाद यादव जी और तेजस्वी यादव जी से पारिवारिक माहौल में मुलाकात हुई और भाजपा को बिहार में 0 पर आउट करने की रणनीति पर बात की.


अब अंदर की जो बात बताई जा रही है, उसके अनुसार लालू प्रसाद यादव ने पप्पू यादव को जन अधिकार पार्टी का राजद में विलय करने की बात कही थी, लेकिन पप्पू यादव ने अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर लिया और लालू प्रसाद यादव इससे चिढ़ गए. बताया जा रहा है कि पप्पू यादव का काम यही से बिगड़ गया. पप्पू यादव, लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव को लेकर एक परिवार की बात करते रहे और पूर्णिया का टिकट उनसे दूर होता चला गया.


पूर्णिया से कांग्रेस का टिकट पाने के लिए पप्पू यादव ने क्या नहीं किया. बताया जा रहा है कि खुद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पूर्णिया सीट कांग्रेस के खाते में देने की मांग लालू प्रसाद से कर चुके थे लेकिन बात नहीं बनी और टिकट ले गईं बीमा भारती. पप्पू यादव ने भी पूर्णिया को लेकर अपनी संवेदनशीलता जाहिर करते रहे. लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव को परिवार का मुखिया मानते रहे. अपने समर्थकों को यह उम्मीद जताते रहे कि टिकट तो आखिर में उन्हीं को मिलेगा पर हुआ ठीक उलट. 


लालू प्रसाद यादव नहीं मानें तो नहीं मानें. अब जबकि पूर्णिया में भाजपा के खिलाफ दो दो उम्मीदवार हो गए हैं तो भाजपा और एनडीए विरोधी वोटों के बंटने का खतरा मंडरा रहा है. अगर ऐसा होता है तो यह न केवल बीमा भारती बल्कि पप्पू यादव के लिए भी मुश्किल भरा हो सकता है.


यह भी पढ़ें- Lok Sabha Election 2024: '5 किलो चावल देकर पीएम मोदी ने लोगों को बंधुआ मजदूर बना लिया है', लालू प्रसाद की बेटी मीसा भारती का बड़ा हमला