Bihar Monument Of National Importance: बिहार को संत, महात्मा और ज्ञानियों की भूमि कहा जाता है. यहां की धरती में गौतम बुद्ध और महावीर का ज्ञान कण-कण में बसता है. लिहाजा बिहार में टूरिज्म के लाखों अवसर हैं. इसके बाद भी बिहार में पिछले 5 साल में एक भी राष्ट्रीय स्थल की खोज नहीं की जा सकी. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि केंद्र सरकार की ओर से ऐसा कहा गया है. केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने संसद में इसकी जानकारी दी. लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उन्होंने कहा, 'केंद्र को पिछले 5 साल में बिहार सरकार की ओर से किसी स्थल को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव नहीं मिला है.' हालांकि इसी टाइम पीरियड में नालंदा में खुदाई के दौरान भगवान बुद्ध की प्राचीनकालीन मूर्तियां और पाली भाषा में लिखी हुई कुछ शिलालेख मिली हैं.


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केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, मौजूदा समय में 70 राष्ट्रीय स्मारक ऐसे हैं और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग इनकी देखरेख कर रहा है. रेड्डी ने इन राष्ट्रीय स्मारकों के रख-रखाव में होने वाले खर्चे की भी जानकारी दी. रेड्डी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2022-23 में एक मार्च तक इन स्मारकों के रख-रखाव में 7.21 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं. 2021-22 में यह रकम 3.35 करोड़ रुपये थी. 


बिहार के पर्यटन में बहार आई


कोरोना के बाद अब बिहार का पर्यटन उद्योग पटरी पर वापस लौटने लगा है. जानकारी के मुताबिक, पिछले वर्ष जितने विदेशी पर्यटक आए थे, उतने इस वर्ष सिर्फ 2 महीने में आ चुके हैं. पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी-फरवरी में 46 लाख 81 हजार 214 पर्यटक आए हैं. विदेशी पर्यटकों की बात करें तो उनकी संख्या  1 लाख 8 हजार 741 है.


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2019 में आए थे रिकार्ड पर्यटक


विदेशी पर्यटकों को बोधगया काफी ज्यादा लुभा रहा है. यहां फल्गु नदी के किनारे महाबोधि का प्राचीन मंदिर स्थित है. इस मंदिर का संबंध सीधे तौर पर भगवान बुद्ध से है. साल 2002 में महाबोधि मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी थी. बिहार में पर्यटकों की बात की जाए तो वर्ष 2019 में सबसे अधिक देसी-विदेशी पर्यटक बिहार आए थे. 2019 में कुल तीन करोड़ 50 लाख पर्यटकों ने बिहार का भ्रमण किया था. इनमें 3 करोड़ 39 लाख देसी जबकि 10 लाख 93 हजार पर्यटक विदेशी थे.