जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष आरसीपी सिंह (RCP Singh) गुरुवार को बीजेपी में शामिल हो गए. पिछले कुछ दिनों से उनके बीजेपी में शामिल होने की अटकलें चल रही थीं. इससे पहले जेडीयू के पूर्व प्रवक्ता डा. अजय आलोक (Dr. Ajay Alok) भी बीजेपी में शामिल हुए थे. अजय आलोक के बीजेपी में आने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि जल्द ही आरसीपी सिंह भी बीजेपी का हिस्सा बन सकते हैं. मोदी सरकार में मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आरसीपी सिंह को पार्टी की सदस्यता दिलाई. 


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आरसीपी सिंह पहले नीतीश कुमार के काफी करीबी माने जाते थे. नीतीश कुमार के वाजपेयी सरकार में रेल मंत्री रहने के दौरान दोनों नजदीक आए और बाद में आरसीपी सिंह ने जेडीयू की सदस्यता ग्रहण कर ली. उसके बाद से वे जेडीयू के लिए काम करने लगे. जब नीतीश कुमार ने पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ा तो आरसीपी सिंह को अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन जब मोदी सरकार में मंत्री बनने की बारी आई तो आरसीपी सिंह को अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा और पार्टी के अध्यक्ष बनाए गए ललन सिंह. 


बस आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार के बीच दूरी यही से बढ़ने लगी. ललन सिंह जेडीयू और नीतीश कुमार पर हावी होते चले गए और आरसीपी सिंह पार्टी से दूर हो गए. आरोप यहां तक लगे कि आरसीपी सिंह भले ही जेडीयू कोटे से मोदी सरकार में मंत्री हैं पर वे काम करते हैं बीजेपी के लिए. खुद नीतीश कुमार ने उन पर बीजेपी के लिए काम करने का आरोप लगाया था. मामला तब फंसा, जब आरसीपी सिंह की राज्यसभा सदस्यता नीतीश कुमार ने रिन्यू नहीं की और उन्हें मोदी सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. इसके बाद से नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह के संबंध सबसे खराब हालत में पहुंच गए और पिछले साल उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. पार्टी से निकाले जाने के बाद से आरसीपी सिंह अपने समुदाय के लोगों के बीच पहुंचकर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे थे. 


आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार एक ही बिरादरी कुर्मी से आते हैं और दोनों का गृह जिला नालंदा है. आरसीपी सिंह के बहाने बीजेपी की नजर कुर्मी वोटरों पर है. कुर्मी वोटर नीतीश कुमार खास वोटर माना जाता है. बीजेपी की मंशा आरसीपी सिंह के बहाने कुर्मी वोटरों में सेंध लगाने की है. अगर आरसीपी सिंह इसमें जरा सा भी सफल होते हैं तो यह नीतीश कुमार के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है.