पटना: Akhilesh Prasad Singh: बिहार कांग्रेस के नए अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने दावा किया है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को बिहार में बमुश्किल 1 या 2 सीट पर जीत हासिल होगी. उन्होंने कहा कि महागठबंधन के सामने भारतीय जनता पार्टी 2024 में कहीं भी नहीं टिकने वाली है और उसे 40 में से मुश्किल से 1 या 2 सीट मिलेगी.


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'बिहार में बनेगी महागठबंधन की सरकार'
अखिलेश प्रसाद सिंह ने दावा किया है कि बिहार में 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की सरकार बनेगी. कांग्रेस नेतृत्व का आभार जताते हुए अखिलेश सिंह ने कहा कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने के लिए मैं पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी को धन्यवाद देता हूं. साथ ही भरोसा दिलाता हूं कि बिहार में एक बार फिर कांग्रेस मजबूत होगी.


क्या होगी चुनौतियां?
राज्य कांग्रेस प्रमुख की जिम्मेदारी मिलने पर अखिलेश सिंह ने अपनी चुनौतियां का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि सबसे पहले मेरी प्राथमिकता बिहार में कांग्रेस संगठन खड़ा करने की होगी.


मदन मोहन झा की जगह मिली जिम्मेदारी
अखिलेश सिंह ने कहा कि मेरा प्रयास होगा कि साथ मिलकर कांग्रेस को मजबूती प्रदान करूं और उस उंचाई पर पार्टी को बिहार में ले जाऊं जहां कांग्रेस को होना चाहिए. बता दें कि मदन मोहन झा के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद पार्टी ने सोमवार को अखिलेश सिंह को पीसीसी चीफ की जिम्मेदारी सौंपी है.


पिछलग्गू का तमगा हटाना होगा!
सिंह के सामने अब चुनौतियों का अंबार है. कांग्रेस 1990 के बाद से बिहार की सत्ता से मुख्य रूप से बाहर है. हालांकि, गठबंधन के साथी के तौर पर कांग्रेस राज्य की सत्ता में रही है लेकिन वो सिर्फ राजद की पिछलग्गू पार्टी बनकर रही गई है. 2015 में कांग्रेस 27 सीटें जीतने में सफल हुई थी वहीं, 2020 में पार्टी 19 सीट पर सिमट गई. 


कैसे खड़ा होगा कांग्रेस का संगठन?
राज्य में पिछले समय से कांग्रेस का संगठन खड़ा नहीं हो पाया है. साथ ही, पार्टी बिहार में अपने चेहरे को लेकर भी संघर्ष कर रही है या कहें कि बिहार में कांग्रेस राजद के भरोसे ही राजनीति करती दिख रही है. अखिलेश सिंह को भी राजद सुप्रीमो लालू यादव का करीबी माना जाता है.


कांग्रेस ने क्यों बनाया पीसीसी चीफ
हालांकि, अखिलेश सिंह अपना पिछला चार चुनाव हार चुके हैं लेकिन बिहार की कास्ट पॉलिटिक्स को देखें तो वो कांग्रेस के लिए फिट दिख रहे हैं. दरअसल, बिहार में जाति सियासत आज भी हावी है. राज्य में भूमिहारों की आबादी करीब 4.7 प्रतिशत है.


इसी को देखते हुए जदयू ने ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है. अखिलेश सिंह भी भूमिहार समाज से आते हैं और बिहार की सियासी नब्ज को समझते हैं. जानकार कहते हैं कि अखिलेश सिंह कांग्रेस को बिहार में कितना मजबूत कर पाएंगे ये दूर की बात है लेकिन राज्य की कास्ट पॉलिटिक्स को देखते हुए वो फिट चेहरा हैं. 


हालांकि, अखिलेश सिंह पर कई बार पार्टी कार्यकर्ताओं ने आरोप भी लगाए हैं लेकिन अब उनके सामने उन्हीं को एकजुट करने की जिम्मेदारी होगी. इसके साथ ही, अखिलेश सिंह के सामने महागठबंधन के दलों में भी समन्वय बनाने की जिम्मेदारी होगी. 


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(इनपुट-रवि त्रिपाठी)