INDIA Alliance Meeting: लोकसभा चुनाव में बीजेपी सरकार को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए आज दिल्ली में INDIA गठबंधन की अहम बैठक दिल्ली में हुई. बैठक में 28 पार्टियों के नेताओं ने हिस्सा लिया. इसमें विपक्षी दलों के साथ मिलकर आगामी लोकसभा चुनाव में सीट शेयरिंग, पीएम उम्मीदवार के नाम के अलावा कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. 


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इंडिया अलायंस की बैठक के समापन के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि आज इंडिया गठबंधन की चौथी बैठक हुई, जिसमें 28 राजनीतिक दलों के नेता मौजूद रहे. सभी ने अपने विचार समिति के समक्ष रखे. 


उन्होंने सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर भी चर्चा की और कहा कि हमने प्रस्ताव पारित किया है कि निलंबन अलोकतांत्रिक है. लोकतंत्र को बचाने के लिए हम सभी को संघर्ष करना होगा और हम सभी इसके लिए तैयार हैं. साथ ही संसद में सुरक्षा उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया. खड़गे ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह या पीएम मोदी को संसद में आना चाहिए और संसद सुरक्षा उल्लंघन के मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा में बोलना चाहिए, लेकिन वे ऐसा करने से इनकार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सदन में इतना कुछ हो रहा है और पीएम मोदी घूम रहे हैं, ये क्या है.


साथ ही उन्होंने कहा कि यह पहली बार है कि देश में संसद के 151 सदस्यों को निलंबित किया गया है. हम इसके खिलाफ लड़ेंगे, यह गलत है. उन्होंने कहा कि सांसदों के निलंबन के खिलाफ लड़ने के लिए एकजुट हुए हैं और 22 दिसंबर को इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है. 


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सूत्रों के मुताबिक गठबंधन की बैठक में आज के तीन बड़े मसलों को लेकर चर्चा की गई.
पहला सीट शेयरिंग:  फिलहाल इंडिया गठबंधन बीजेपी के सामने 400 से 450 सीटों पर एक उम्मीदवार देना चाहता है, लेकिन खुद कांग्रेस 275 से 300 सीटें लड़ना चाहती है. वहीं इंडिया में शामिल दल चाहते हैं कि कांग्रेस 200 से 250 सीटों के बीच लड़े.


दूसरा संयोजक और चेयरपर्सन- इंडिया अलायंस के संयोजक को लेकर उद्धव ठाकरे, ममता बनर्जी और नीतीश कुमार के नाम हैं, जिस पर आम सहमति से फैसला होना है. अगर सहमति नहीं बनती तो मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम आगे किया जा सकता है. हालांकि कांग्रेस चाहती है कि संयोजक पद आम सहमति से सहयोगी दल को मिले और जरूरत पड़ने पर खड़गे इंडिया गठबंधन के चेयरपर्सन बनें.


तीसरा पीएम उम्मीदवार- सत्ता रूड़ और विपक्षी दलों की लड़ाई मोदी बनाम जनता की ही रखी जाए, इसलिए किसी को पीएम उम्मीदवार के तौर पर पहले न पेश किया जाए. जांच एजेंसियों के गलत इस्तेमाल और कथित तौर पर संसद में निलंबन जैसी तानाशाही की कार्रवाई के खिलाफ एकजुटता हो. संयुक्त रैली, संयुक्त प्रचार, संयुक्त मुद्दों को तय किया जाए.