नई दिल्‍ली:  ज़ी न्‍यूज़ आपके साथ अपने रिश्ते की 26वीं वर्षगांठ मना रहा है. इस रिश्ते को सेलिब्रेट करने के लिए हम हर दिन यादों की पुरानी एलबम के कुछ सुनहरे पन्ने खोलते हैं. आज हमने आपके लिए इस स्वर्णिम यात्रा की चौथी इंस्‍टॉलमेंट तैयार की है, जिससे आपको भी मुस्कुराने की एक सुंदर और छोटी सी वजह भी मिलेगी.


पीएम मोदी का इंटरव्‍यू 


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इस कड़ी में आज हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो इंटरव्यू का एक छोटा सा हिस्सा लेकर आए हैं. उनका पहला इंटरव्यू 12 जुलाई 2001 का है यानी गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से पहले का और दूसरा इंटरव्यू वर्ष 2018 का है यानी प्रधानमंत्री बनने के बाद का है. कैलेंडर बदल गया. देखते-देखते 20 वर्ष गुजर गए. नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री से देश के प्रधानमंत्री बन गए, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का अंदाज, तेवर और व्यक्तित्व आज भी वैसा ही है.


ये प्रधानमंत्री मोदी का ऐसा इंटरव्‍यू है, जो कभी पुराना नहीं हो सकता क्योंकि, जब आप 20 वर्ष पहले वाले नरेंद्र मोदी को सुनेंगे तो ऐसा लगेगा जैसे आज के प्रधानमंत्री मोदी आपसे बातें कर रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान को लेकर तब भी बहुत सख्त थे और आज भी हैं. कश्मीर को लेकर उनकी राय 20 साल पहले जो थी, आज भी वही है.



जब जॉर्ज फर्नांडिस को देना पड़ा था इस्‍तीफा 


चाहे मुख्यमंत्री हों या केंद्रीय मंत्री हर किसी के लिए Zee News सबसे बड़ा मंच होता था. साल 2001 में तत्कालीन समता पार्टी की नेता जया जेटली पर रिश्वत लेने का आरोप लगा था, जिसके बाद उस वक्त के रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस को इस्तीफा देना पड़ा था. तब नीतीश कुमार, स्वर्गीय साहिब सिंह वर्मा और दिग्विजय सिंह ज़ी न्‍यूज़ के स्टूडियो आए थे.


2004 लोक सभा चुनाव


वर्ष 2004 में लोक सभा चुनाव हुए थे और तब देश में UPA की सरकार बनी थी. उस वक्त प्रियंका वाड्रा ने उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में कांग्रेस के लिए प्रचार किया था. प्रचार के दौरान ही उन्होंने ज़ी न्‍यूज़ से बात की थी. प्रियंका वाड्रा ने ज़ी न्‍यूज़ को बताया था कि कांग्रेस के लिए उसके कार्यकर्ता कितने महत्वपूर्ण हैं और पार्टी की जीत-हार में उनका किरदार कितना खास है. 


दंगों और सीरियल ब्‍लास्‍ट पर ज़ी न्‍यूज़ की निडर रिपोर्टिंग 


2014 से पहले हमारे देश में हर वर्ष किसी ना किसी शहर में सीरियल ब्लास्ट होते थे. वर्ष 2003 से 2007 तक, इन चार वर्षों में दिल्ली और मुंबई जैसे शहर आतंकवादियों की हिट लिस्ट में रहे, लेकिन वो हिंदुस्तानियों का हौसला नहीं तोड़ पाए. ऐसी हर घटनाओं को देश ने Zee News के ज़रिये ही देखा. 


दंगों के जरिए देश के इतिहास को हमेशा कलंकित करने की साजिश हुई हैं. फिर चाहे वो 2002 का गुजरात हो या 2020 का दिल्ली दंगा. ज़ी न्‍यूज़ ने निडर होकर दंगे का एक-एक सच आप तक पहुंचाया.


सबसे बड़ा शेयर बाजार घोटाला


वर्ष 1992 को भूलना मुश्किल है. इस वर्ष देश का सबसे बड़ा घोटाला हुआ. शेयर बाजार घोटाला, राजकोट से मुंबई आए हर्षद मेहता की जेब खाली थी लेकिन दिमाग दांव पेंच से भरा हुआ और उसने उसी दांव पेंच से देश के शेयर बाजार को सबसे बड़े घोटाले से हिलाकर रख दिया.