Hemant Soren Cabinet Expansion: सियासत को अनिश्चितताओं का खेल यूं ही नही कहा जाता है. मौसम तो बदलने में एक वक्त लेता है लेकिन राजनीति किसी भी पल बदल सकती है. ठीक ऐसा ही हुआ झारखंड की राजनीति में जब चम्पई सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार से महज़ कुछ घण्टे पहले कांग्रेस का जमकर पॉलिटिकल ड्रामा देखने को मिला. हेमंत सरकार में रहे कांग्रेस खेमे से 4 मंत्रियों को चंपई कैबिनेट में भी जगह मिलने से नाराज थे. कांग्रेस ने अपनों के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया था. विधायकों का सीधे तौर पर कहना था कि वह मंत्रिमंडल में फेरबदल चाहते हैं क्योंकि अपने ही मंत्रियों के काम से असंतुष्ट हैं. और ऐसा इसीलिए है क्योंकि उनकी बातों को मंत्री नहीं सुनते हैं.


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असल में एक तरफ जहां कैबिनेट में दुबारा जगह मिलने से 4 विधायकों के खुशी का ठिकाना नही था वही दूसरी तरफ नाराज विधायकों की नाराजगी ने खुशियों पर ही खलल डालने का काम कर दिया. विधायकों ने ऐलान कर दिया कि वह मंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होंगे इसके बाद क्या कांग्रेस प्रदेश प्रभारी और विधायक दल के नेता के होश उड़ गए. 


और फिर शुरू हुआ रूठे को मनाने का सिलसिला. पहले से ही सर्किट हाउस में जम विधायकों को मनाने के लिए प्रभारी और विधायक दल के नेता सर्किट हाउस पहुंच गए और एक बार फिर यह सर्किट हाउस झारखंड की राजनीति का केंद्र बिंदु बन गया. नाराज विधायकों को मनाने के लिए प्रदेश प्रभारी नेता विधायक दल और प्रदेश अध्यक्ष ने उनसे तकरीबन डेढ़ घंटे तक बातें हुई.


आखिर में सभी विधायकों के साथ प्रभारी राज भवन के लिए निकले प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने कहा कि विधायकों की मांगे जायज है और उनकी सुनी जानी चाहिए. वही एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मंत्रियों के कार्य का आकलन होगा और जरूरत पड़ी तो बदले भी जा सकते हैं. इधर नाराज विधायकों ने स्पष्ट कह दिया 12 विधायकों के सिग्नेचर से समर्थन पत्र प्रभारी को सौंप दिया गया है और उन्होंने बातों को आला कमान तक पहुंचा दिया है और उनके ही आश्वासन के बाद सभी लोग राजभवन जा रहे हैं.