भोपालः केंद्र सरकार ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर 5 साल का बैन लगा दिया है. साथ ही सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने पीएफआई पर अपना शिकंजा और कड़ा कर दिया है. बता दें कि मंगलवार को एक बार फिर से एनआईए ने पीएफआई (Popular Front Of India) के ठिकानों पर मध्य प्रदेश में छापेमारी की. एनआईए और एटीएस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए प्रदेश के 7 जिलों भोपाल, इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, श्योपुर, गुना के विभिन्न शहरों में छापेमारी कर पीएफआई से जुड़े 21 संदिग्धों को हिरासत में लिया. एनआईए (NIA) की पूछताछ में पीएफआई को लेकर बड़े खुलासे हुए हैं. जिनमें पता चला है कि पीएफआई 2047 तक भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने की योजना पर काम कर रहा था!


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युवाओं को दी जा रही थी सैलरी
एनआईए की जांच में खुलासा हुआ है कि पीएफआई ने मध्य प्रदेश को अपना ट्रेनिंग सेंटर बनाया हुआ था और यहां पढ़े-लिखे युवाओं को देश विरोधी गतिविधियों की ट्रेनिंग दी जा रही थी. उज्जैन और इंदौर से गिरफ्तार लोगों से पूछताछ में पता चला है कि देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए युवाओं को 40 हजार रुपए महीने की सैलरी दी जा रही थी और इसके लिए प्रोफेशनल्स और ग्रेजुएट युवाओं को भर्ती किया जा रहा था. 


एनआईए और एमपी एटीएस ने इंदौर और उज्जैन से पीएफआई के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया था. जिनमें इंदौर से गिरफ्तार अब्दुल करीम बेकरीवाला पीएफआई का प्रदेश अध्यक्ष है. अन्य गिरफ्तारियों में इंदौर निवासी अब्दुल खालिद पीएफआई का जनरल सेक्रेटरी है. इंदौर से गिरफ्तार मोहम्मद जावेद पीएफआई का प्रदेश कोषाध्यक्ष है. वहीं उज्जैन से गिरफ्तार जमील शेख पीएफआई का प्रदेश सचिव है. इनके पास से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, देश विरोधी दस्तावेज और डिजिटल दस्तावेज बरामद हुए हैं. 


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मध्य प्रदेश के 25 जिलों में फैला पीएफआई का नेटवर्क
पूछताछ में पता चला है कि मध्य प्रदेश में पीएफआई काफी गहरे तक अपनी जड़ें जमा चुका है और राज्य के 25 जिलों तक इस संगठन का नेटवर्क फैल गया है. इनमें से 5 जिले श्योपुर, बुरहानपुर, इंदौर, उज्जैन, खंडवा पीएफआई के हॉटस्पॉट हैं. एमपी के ज्यादातर उन्हीं जिलों में पीएफआई सक्रिय है, जहां पहले प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी का संगठन था. इतना ही नहीं जो लोग सिमी के साथ सक्रिय थे, वो अब पीएफआई के साथ जुड़ चुके हैं. जांच में पता चला है कि पीएफआई पढ़े लिखे मुस्लिम युवाओं को धार्मिक कट्टरता का पाठ पढ़ा रहा है. प्रदेश के बड़े मुस्लिम कारोबारियों द्वारा PFI को चंदा देने का भी खुलासा हुआ है. 


जिन जिलों में पीएफआई सक्रिय है, उनमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाला मामला श्योपुर का है. श्योपुर में मुस्लिम आबादी कम है लेकिन पिछले 6 महीने में श्योपुर में पीएफआई की सक्रियता सबसे ज्यादा बढ़ी है. उल्लेखनीय है कि हाल ही में श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीका से आए चीतों को छोड़ने के लिए पीएम मोदी श्योपुर आए थे. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राजस्थान से नजदीकी होने के चलते श्योपुर में पीएफआई की गतिविधियां यहां सबसे तेजी से बढ़ी हैं.  


मध्य प्रदेश में हो रहा लोगों को जोड़ने का काम
सूत्रों के अनुसार, पीएफआई मध्य प्रदेश में तेजी से विस्तार कर रहा है. पीएफआई के सदस्य दूसरे राज्यों से मध्य प्रदेश में आकर बड़ी संख्या में लोगों को अपने साथ जोड़ने का काम कर रहे हैं. आरोप है कि पीएफआई के सदस्य लोगों को गुमराह कर देश विरोधी गतिविधियों के लिए उकसा रहे थे. पीएफआई सदस्य जगह जगह मीटिंग कर आपत्तिजनक साहित्य बांटने और देश विरोधी गतिविधियों के लिए लोगों को उकसाने का काम कर रहे थे.


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खरगोन, बड़वानी में हुई हिंसा में पीएफआई का हाथ!
मध्य प्रदेश में खरगोन और बड़वानी में बीते दिनों हुई सांप्रदायिक हिंसा में PFI का भूमिका को लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने आरोप लगाया था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मालवा के ज्यादातर जिलों में संगठन के कार्यकर्ता सक्रिय हैं. निमाड़ के खंडवा-खरगोन सहित इंदौर, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, देवास, शाजापुर, भोपाल, रायसेन और जबलपुर में भी बड़े पैमाने पर पीएफआई कार्यकर्ता सक्रिय हैं.