Ruckus On Kumar Vishwas Program: राहुल सिंह राठौड़/उज्‍जैन। बाबा महाकाल  (Baba Mahakal) की नगरी उज्जैन (Ujjain) में इन दिनों विक्रमोत्‍सव (Vikramotsav) चल रहा है. जिसका शुभारंभ महाशिवरात्री के रोज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj) ने किया था. इसमें विभिन्न तरह के आयोजन हो रहे हैं. इसीक्रम में प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास के अपने-अपने राम (Apne Apne Ram Katha) सिरीज का भी आयोजन शुरू हुआ. लेकिन, पहले ही दिन कार्यक्रम में हंगामा हो गया. यहां पहुंचे कुछ लोगों को बिना पास के एंट्री नहीं दी गई (No Entry Without Pass) जिसके बाद उन्होंने कड़ा विरोध जताया.


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विरोध कर रहे लोगों ने क्या कहा?
कुमार विश्वास को सुनने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. लेकिन, जब कुछ लोगों को बिना पास के एंट्री नहीं मिल पाई तो आयोजन स्थल के बाहर हंगामा खड़ा हो गया. लोगों ने विरोध किया की विक्रम उत्सव शासन की ओर से किया जाने वाला आयोजन है. अब तक किसी प्रकार की पास की जानकारी सार्वजनिक रूप से नहीं दी गई.


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महाशिवरात्रि से शुरू हुआ है कार्यक्रम
भारत उत्‍कर्ष, नवजागरण और वृहत्‍तर भारत की सांस्‍कृतिक चेतना पर एकाग्र विक्रमोत्‍सव 2023 का आगाज सीएम शिवराज ने महाशिवरात्रि के दिन शिप्रा के राम घाट से किया था. जिसके बाद मंगलवार दूसरे दिन विक्रम सम्‍वत् 2079 के तहत वासुदेव: सर्वम का मंचन हुआ. यहां अपने-अपने राम कार्यक्रम की तीन दिवसीय शुरुआत हुई. इसी आयोजन के लिए फेमस कवि-लेखन कुमार विश्‍वास ने राम कथा के लिए पहुंचे हुए थे.


अब होंगे ये आयोजन
अपने कार्यक्रम में कुमार विश्‍वास ने भगवान श्रीराम के जीवन पर आधारित प्रेरक प्रसंगों को वर्तमान जीवन शैली से जोड़कर उसकी व्‍याख्‍या की. अब राम कथा कार्यक्रम के दूसरे दिन आज शंकर के राम और अंतिम दिन राम के शंकर कार्यक्रम होंगे.


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मोहन यादव ने रखी कार्यक्रम की प्रासंगिता
उच्‍च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने विक्रमोत्‍सव 2023 की जानकारी देते हुए सम्राट विक्रमादित्‍य की विदेशी अक्रांताओं पर विजयी पताका का संदर्भ बताते हुए कार्यक्रम की प्रासंगिता को सामने रखा. 


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नृत्यनाटिका की प्रस्‍तुति हुई
नाट्य रंग कार्यक्रम के दूसरे दिन विक्रम कीर्ति मंदिर सभागार में वासुदेव: सर्वम नृत्‍यनाटिका की प्रस्‍तुति हुई. यह नृत्यनाटिका कंसवध के पश्चात् भगवान श्रीकृष्ण एवं बलदाऊ के अवंतिका आगमन और आचार्य सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त करने तथा शिक्षा पूर्ण कर गुरु दक्षिणा दिए जाने के प्रसंग पर आधारित है. जिसका उल्लेख श्रीमद्भागवत के दशम स्कन्ध के पेंतालिसवें अध्याय में किया गया है.