प्रकाश प्रियदर्शी, नई दिल्ली: पेट्रोलियम पदार्थों के भारी दामों को लेकर चौतरफा हमले झेल रही मोदी सरकार का अगला कदम पेट्रोल और डीजल से पहले नेचुरल गैस को जीएसटी के दायरे में लाने का है. इसके लिए प्रयास भी तेज कर दिए गए हैं. सूत्रों के मुताबिक कई राज्यों ने जीएसटी काउंसिल को नेचुरल गैस से जुड़े राजस्व का ब्यौरा सौंप भी दिया है. जानकारी के मुताबिक पंजाब और पश्चिम बंगाल ने प्राकृतिक गैस से जुड़े राजस्व संबंधी रिपोर्ट सौंप दिए हैं. सूत्रों के मुताबिक अगले कुछ दिनों में गुजरात और महाराष्ट्र भी अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे.


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इनपुट टैक्स क्रेडिट न मिलने के चलते हो रही है परेशानी
माना जा रहा है कि अगले जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में इस पर चर्चा हो सकती है. उम्मीद की जा रही है कि जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक इस महीने के अंत तक हो सकती है. सूत्रों के मुताबिक सरकार जल्द से जल्द नेचुरल गैस को जीएसटी के दायरे में लाना चाहती है क्योंकि इंडस्ट्री को अभी इस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल रहा है जिससे कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन में बढ़ोतरी हो रही है.


पीएनजी के जीएसटी में आने से होगा कंज्युमर का फायदा
आपको बता दें कि स्टील, कैमिकल, फर्टिलाइजर और सीमेंट जैसी इंडस्ट्री में नेचुरल गैस की सबसे ज्यादा खपत हो रही है जिस वजह से इंडस्ट्री इसे तुरंत जीसएटी में लाने की डिमांड कर रही है. माना जा रहा है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलने से फाइनल प्रोडक्ट की कीमतें भी कम होंगी. जिससे इसका सीधा लाभ कंज्युमर को भी होगा. सीमेंट, खाद, स्टील के बाय प्रोडक्ट की कीमतें कम होंगी जिसका फायदा कंज्युमर को होगा.


ये पांच पदार्थ अभी जीएसटी से हैं बाहर
ऐसी उम्मीद की जा रही है कि नेचुरल गैस को जीएसटी के दायरे में लाने पर पर पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) और सीएनजी (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) कुछ सस्ती हो सकती है. यहां आपको यह भी बता दें फिलहाल पांच पेट्रोलियम उत्पाद कच्चा तेल, डीजल, पेट्रोल, एटीएफ और नेचुरल गैस जीएसटी से बाहर हैं. अब यह जीएसटी काउंसिल को तय करना है कि इन पांचों उत्पादों पर कब से जीएसटी लगाया जाए. क्योंकि इन पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने की डिमांड काफी समय से उठ रही है.