बानसूर: दीपावली का उत्साह चारो तरफ देखते ही बनता है, आज हम आपको एक ऐसे गांव की दास्तान बताते हैं, जहां दिवाली पर श्मशान घाट में पूजा होती है. यहां नवजात शिशुओं को लेजाकर महिलाएं धोक लगवाती हैं. लंबी उम्र के लिए आशीर्वाद लेती है. यह गांव है अलवर जिले के बानसूर तहसील के गांव गूता में. 36 कोम की तरफ यह प्रथा चली आ रही है. जिसमे दीपावली पर सुबह से ही श्मशान घाट पर महिलाएं बच्चे सब पहुंचते हैं, वहां स्थित सती माता मंदिर पर पूजा आराधना करते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से बच्चो को लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है.


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स्थानीय निवासी राजकुमार का कहना है कि लगभग 400 साल पहले गूता गांव का एक लड़का और बाबरिया गांव की एक लड़की जो दोनों यादव समाज के थे, जिनकी सगाई की रस्म पूरी होने के कुछ दिन बाद लड़की का पति गूता निवासी की मौत हो गई थी. लड़की को अपने पति की मौत की सूचना मिलते ही वह भी अपने पति के पास श्मशान घाट पर पति के वियोग में सती होने के लिए चली गई. 


बताया जाता है कि लड़की को अपने पति की मृत्यु का पता लगा, उस दिन लड़की पशुओं का गोबर डाल रही थी कि अचानक उसने अपने हाथों पर गोबर की जगह मेहंदी रचने लगी, तो उसे अपने पति की चिंता सताई. तो उसने देखा कि उसका पति मृत है. उस समय वह पति के मृत शरीर के बराबर कुछ दूरी पर बैठ गई, तो उसके शरीर को स्वत ही अग्नि लग गई और वह सती हो गई.


बताया यह भी जाता है कि माता सती के साथ एक कुत्ता भी आया था वह भी उस स्थान पर कुछ दूरी पर पत्थर की मूर्ति के रूप में बन गया. अब यहां आस-पास के गांवों की सभी महिलाएं होली और दीपावली पर नंगे पांव पैदल चलकर पूजा के लिए गांव के श्मशान घाट पहुंचती हैं. जहां बैठकर सती माता की कहानी सुनती हैं.


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