Bhilwara : भीलवाड़ा में कोठारी नदी के प्रदुषण को लेकर नगर परिषद पर लगाए गए दस करोड के जुर्माने के खिलाफ परिषद सुप्रीम कोर्ट में अपील करने जा रही हैं, वहीं सभापति राकेश पाठक ने यह कहकर चौकाया कि एनजीटी द्वारा पूर्व में लगाए गए जुर्माने की उन्हें जानकारी ही नहीं हैं.  उन्होंने अपने ही कर्मचारियों व अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि ऐसे कारिंदों के खिलाफ उन्होंने कार्रवाई की अनुशंषा की हैं. 


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पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू की याचिका पर एनजीटी नगर परिषद को कोठारी नदी को फैल रहे प्रदुषण और बढते अतिक्रमण से मुक्त नहीं करा पाने के कारण कई बार चेताया और जुर्माना भी लगाया लेकिन बार-बार की चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए जिम्मेदार लोगों ने फोरी कार्रवाई की.  ऐसे में एनजीटी ने 16 और 17 अगस्त की सुनवाई के दौरान नगर परिषद पर दस करोड रुपए का जुर्माना ठोक दिया.



इस जुर्माने से नगर परिषद में हडकंप मचा है और सभापति राकेश पाठक ने तो यहां तक कह दिया कि पूर्व में एनजीटी द्वारा लगाए गए जुर्माने की उन्हें जानकारी ही नहीं हैं और ना ही उन्हें किसी ने जानकारी दी.  उन्होंने अपने ही जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर इस मामले में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए एक ईओ नोट आयुक्त और जयपुर निदेशालय में लिखकर भेजा है जिसमें उन्होंने दोषियों के खिलाफ सीधे-सीधे कार्रवाई की मांग की हैं. 


सुप्रीम कोर्ट में करेंगे अपील


सभापति पाठक ने कहा कि एनजीटी द्वारा लगाए गए दस करोड़ रुपए के जुर्माने के खिलाफ नगर परिषद सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी.  साथ ही उन्होंने कहा कि अब तक इस मामले में लापरवाही बरती गई, लेकिन अब इस मामले को गंभीरता से लिया गया और नगर परिषद अधिवक्ताओं को भी हायर कर रहा हैं. 


ये जांच भी हो


सभापति पाठक ने कहा कि कोठारी नदी में प्रदुषणयुक्त पानी कहां से आ रहा हैं, इसकी जांच होनी चाहिए.  नगर परिषद एरिया में कितना प्रदुषण है और इससे पहले कितना प्रदुषण इस नदी में फैला हुआ है, उन्होंने कहा कि नगर परिषद क्षेत्र से पहले भीलवाड़ा डेयरी, अंसल, मांडल क्षेत्र के प्रोसेस हाउस, आरजिया, पालड़ी के साथ ही अन्य निजी कॉलोनियां का प्रदूषित पानी भी भीलवाड़ा नगर परिषद क्षेत्र में आकर मील रहा हैं.  उन्होंने अपने अधिकारियों की इस मामले में भी लापरवाही मानी और एनजीटी के सामने इस मुद्दे को नहीं रखा, उन्होंने प्रदुषण नियंत्रण मंडल से इस तरह की जांच कराने की मांग की है. 


रूडीफ और जिंदल जिम्मेदार


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सभापति ने कोठारी नदी में प्रदुषण फैलने के पीछे रूडीफ और जिंदल को जिम्मेदार ठहराया है.  उन्होंने कहा कि रूडीफ ने अब तक शहर के 45 हजार आवासों में से मात्र 18 से 20 हजार घरों में ही कनेक्शन कर पाए है, जबकि यह काम 2020 में ही खत्म करना था और अब तक एसटीपी प्लांट भी चालू नहीं हो पाया हैं.  इसके लिए रूडीफ के अधिकारी सीधे-सीधे जिम्मेदार है.  उन्होंने जिंदल शॉ लि. पर भी आरोप लगाया कि शहर का दस एमएलडी पानी फिल्टर कर लेना था, लेकिन 6. && एमएलडी पानी ही उपयोग किया हैं, बाकी गंदा पानी सीधा नदी में पहुंच रहा हैं.