MP Devji M. Patel Budget reaction: शुक्रवार को राजस्थान विधानसभा में सीएम अशोक गहलोत ने वर्तमान सरकार का पांचवा बजट पेश किया. बजट पेश होने के बाद राजनीति गलियारो से बजट को लेकर चर्चाएं गर्मा रही थी. इसी बीच जालोर से सांसद देवजी एम. पटेल ने भी गहलोत के बचत-बढ़त-राहत वाले बजट पर निशाना साधा है.


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 सांसद  पटेल ने  कहा कि राजस्थान विधानसभा में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत  के जरिए पेश किया गया अंतिम राजस्थान का बजट केंद्र सरकार की योजनाओं को राज्य सरकार ने अपने नाम से पेश किया है. यह केवल वाहवाही लूटने का प्रयास है, तथा चुनावी वर्ष होने के कारण प्रदेश की जनता को केवल झूठ के सपने दिखाये गये हैं.


मुख्यमंत्री का पूरा फोकस बजट की ब्रांडिंग पर था, सरकारी पैसे का दुरूपयोग कर वाहवाही लूटने के लिए बजट का खूब प्रचार किया, लेकिन अफसरों के बनाये बजट को एक बार देखा भी नहीं.


आज का दिन राजस्थान विधानसभा के इतिहास में काले दिवस के रूप में दर्ज होगा. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पुराने बजट भाषण की प्रतियां सदन मे पढ़ी, उससे यही साबित होता है कि उन्होंने इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज को एक बार पहले देखना-समझना भी उचित नहीं समझा.


मनमर्जी की कर रहे घोषणाएं
गहलोत ने पूरी तरह से चुनावी बजट प्रस्तुत किया, बजट की सभी घोषणाएं हवा में है, इनका कोई धरातल नहीं है. मुख्यमंत्री जी अच्छी तरह जानते हैं कि 2023 में उनकी सरकार वापस नहीं आ रही है, इसलिए वो मनमर्जी की घोषणाएं कर रहे हैं.


टास्क फोर्स सरकार की नाकामी का परिणाम
मुख्यमंत्री नए महात्मा गांधी स्कूल खोलने की बात करते हैं जबकि पुराने विद्यालयों में ही अध्यापकों की पर्याप्त संख्या नहीं है. आज राजस्थान की जनता का दुर्भाग्य है की पेपर लीक टास्क फोर्स बनानी पड़ रही है. यह टास्क फोर्स सरकार की नाकामी का ही परिणाम है. सरकार ही जब पेपर लीक माफिया को संरक्षण देगी तो टास्क फोर्स क्या करेगी.


किसान कर रहे है  कर्ज माफी का इंतजार
किसान आज भी 10 दिनों में कर्ज माफी का इंतजार कर रहे हैं, युवाओं को रोजगार देने की पिछले बजट की घोषणाएं भी अभी तक पूरी नहीं हुई है. इसके विपरीत केंद्र सरकार का बजट सर्व कल्याणकारी है, जिसकी घोषणाएं हमेशा की तरह धरातल पर भी साकार होगी और देश का चहुमुंखी विकास होगा.


राज्य सरकार के जरिए प्रस्तुत किये गये प्रत्येक बजट में केंद्र प्रवर्तित योजनाओं को अपने नाम से राज्य सरकार ने पेश करने का प्रयास किया. मनरेगा से लेकर कृषि बजट में पेश की गई अधिकांश योजनाएं केंद्र सरकार की योजनाओं का ही अंश है. इसी प्रकार पर्यटन संस्कृति, स्वच्छ भारत मिशन, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के लिए और हर घर जल के लिए स्वच्छ जल मिशन, समग्र शिक्षा अभियान, पीएम श्री योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, जनजाति एकलव्य विद्यालय, राजिविका, वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांग पेंशन योजना, कॉलेजों के लिये फंड, मेडिकल कॉलेज, ग्रामीण सड़के, मनरेगा भी भारत सरकार की ही योजना का हिस्सा है.


चिकित्सा, शिक्षा, किसान, युवा सभी क्षेत्रों में सरकार के पूर्व के वादे अधूरे हैं. इस बार फिर नए वादे करके लोगों को दिग्भ्रमित करने का काम हो रहा है. डीजल पेट्रोल पर वैट, आम नागरिकों की सुरक्षा को भी इस बजट में पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है.


इसके अलावा किसानों को लेकर विशेष बजट में कुछ भी नया नहीं है .केंद्र की मोदी सरकार ने किसानों को सीधे उनके खाते में फायदा देने के लिए किसान सम्मान निधि और फसल बीमा योजना का फायदा दिया है, जबकि इस बजट में अलग कृषि बजट का दावा किया है इसमें ऐसा कुछ भी विशेष नहीं है.


किसानों को सीधा व्यक्तिगत फायदा ना देकर अनुदान के नाम पर घुमाया जाएगा, धरातल पर इसके क्रियान्वित की संभावना बहुत कम है. किसानों को नए कृषि ऋण देने की बात कही लेकिन कभी भी किसानों से ऋण माफी की बात नही की, जबकि इनके घोषणापत्र में किसानों की ऋणमाफी ही प्राथमिकता पर थी. युवाओं के रोजगार के नाम पर उनको पुनः भ्रामित किया गया है, उनका बेरोजगारी भत्ता आज तक इंतजार कर रहा है, युवाओं से किये गए सारे वादे धरे के धरे रह गए है.


कांग्रेस सरकार का यह अंतिम बजट हैं तथा इस बजट के लोक लुभावने वादों को जनता पहले ही पुरी तरह से नकार चुकी हैं, हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी केवल थोथे वादे प्रदेश की जनता पर थोपे गये हैं.