Jaipur News: आरक्षण पर आर-पार करने वाले गुर्जरों की आपसी लड़ाई अब सबके सामने आ गई है. एकजुटता की मिसाल देने वाले गुर्जर नेताओं में आपसी फूट खुलकर दिखाई दे रही है, जो गुर्जर नेता कर्नल किरोडी बैंसला के साथ आंदोलन को मजबूत करते थे, अब वहीं नेता एक-दूसरे पर कड़े शब्दों में तंज कसने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे. चुनावी साल से पहले क्या राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए गुर्जर नेता आपस में उलझ रहे है? 


COMMERCIAL BREAK
SCROLL TO CONTINUE READING

आपसी फूट, अब सबके सामने
आरक्षण की लड़ाई लड़ने वाले कर्नल किरोड़ी बैंसला के एक इशारे पर गुर्जर आंदोलन की राह पर उतर आते थे, आज वहीं, आरक्षण संघर्ष समिति से जुडे़ गुर्जर नेता आपस में उलझ रहे हैं, जिस राह पर कर्नल किरोड़ी बैंसला चला करते थे, उसी रास्ते पर पूरा समाज चल पड़ता था, लेकिन अब उसी संघर्ष समिति के गुर्जर नेताओं की राह और रास्ते दोनों अलग-अलग हो गए है. एकजुटता की मिसाल देने वाले गुर्जर नेताओं की आपसी फूट अब सामने सामने आ गई है, लेकिन इस फूट से सवाल ये उठ रहे है कि क्या राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए गुर्जर नेताओं ने आपसी गुट तो नहीं बना दिए, क्योंकि इन नेताओं ने राजनीतिक पार्टियां ज्वाइंन कर चुनावों से पहले एक-दूसरे पर हुंकार भरी ली है.


आरक्षण की पटरी से राजनीति की सवारी 
कर्नल किरोड़ी बैंसला का हाथ थामकर जो गुर्जर नेता आरक्षण की लड़ाई लड़ा करते थे, आज वही नेता आरक्षण की पटरी से राजनीति की सवारी करने के लिए बेताब बैठे हैं. कर्नल किरोडी बैंसला के बेटे विजय बैंसला ने पहले से ही बीजेपी की सदस्यता ली हुई है, जिसके बाद में अब उनका झुकाव बीजेपी की तरफ दिखाई दे रहा है और वे चुनाव से पहले एक्टिव हो गए हैं. दूसरी तरफ गुर्जर नेता हिम्मत सिंह ने पीसीसी की सदस्यता मिली है, जबकि शैलेंद्र सिंह ने बीजेपी का दामन थामा हुआ है. हालांकि कर्नल किरोड़ी बैंसला ने भी बीजेपी के टिकट से सांसद का चुनाव लड़ा था, लेकिन इसके बाद भी संघर्ष समिति में फूट नहीं हुई थी.


थाम लिया बीजेपी-कांग्रेस का दामन 
अब ये गुर्जर नेता एक-दूसरे पर निशाना साधने में कोई कसर नहीं छोड रहे हैं. विजय बैंसला ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के विरोध की चेतावनी क्या दी, दूसरे गुर्जर नेताओं उन पर जमकर बरस रहे हैं. गुर्जर नेता हिम्मत सिंह ने कहा कि विजय ने आरक्षण पर कभी काम ही नहीं किया. हम आंदोलन में गोलियां खा रहे थे, तब वे विदेश में एश कर रहे थे.


महापंचायत में ही होगा नए अध्यक्ष का फैसला
जबकि शैलेंद्र सिंह ने विजय बैंसला पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार के साथ बंद कमरे में वे क्या गुफ्तगू कर रहे.10-10 मंत्रियों से मिल रहे, समाज को इस बारे में कोई जानकारी ही नहीं. 2005 में कर्नल बैंसला को महापंचायत में जिस तरह से सबने चुनकर अध्यक्ष बनाया, उसी तरह से नया लीडर चुना जाएगा.


समाज के साथ खड़ा होना सीखो-विजय बैंसला
वहीं, विजय बैंसला पहले ही पलटवार करते हुए जवाब दे चुके है. उन्होने कहा कि समाज के साथ खड़ा होना सीखो, पार्टी के साथ तो खड़े हो. समाज के साथ खड़ा नहीं होंगे तो आपके साथ समाज खड़ा नहीं होगा, नेतागिरी को समाज में दीजिए, समाज में अपनी नेतागिरी को इस्तेमाल ना करें.