Jaipur: राजस्थान में राज बदलते ही अब बदलाव की घडी आ गई है. अब जलदाय विभाग भ्रष्टाचार को जमीन से खोदकर उखाडेगा. पीएचईडी के सभी वर्क इन प्रोग्रेस प्रोजेक्ट्स की जांच होगी. जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी के निर्देश आदेश जारी किए गए. लेकिन इन प्रोजेक्ट्स की जांच होने से पहले ही रिजल्ट पर शंका बनी हुई. आखिर जांच से पहले सवाल क्यों खडे हो रह है,देखिए इस रिपोर्ट में...


COMMERCIAL BREAK
SCROLL TO CONTINUE READING


कहीं जांच तो प्रभावित नहीं होगी?


राजस्थान की भजनलाल सरकार इसी मंशा के साथ काम कर रही है कि भ्रष्टाचार को जड से उखाडना है.लेकिन जलदाय विभाग में भ्रष्टाचार और घोटालों को उखाडना इतना आसान काम नहीं. जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी के निर्देश पर प्रदेश के सभी वर्क इन प्रोग्रेस प्रोजेक्ट्स की जांच होगी. लेकिन जांच से पहले ही होने वाली जांचों पर सवाल खडे हो रहे है.


ऐसा इसलिए क्योकि जिन इंजीनियर्स ने काम करवाए,उन इंजीनियर्स के रहते ही संबंधित रीजन में प्रोजेक्ट्स की जांच होगी.ऐसे में जांच पर पूरी तरह से शंका बनी रहेगी.यानि सरकार की मंशा पूरी नहीं हो पाएगी.क्योकि उन्ही इंजीनियर्स के वही प्रोस्टेट होने पर जांच पूरी तरह से प्रभावित हो सकती है.क्योकि मिलीभगत का खेल उपर से नीचे तक हुआ था.


जेजेएम को लूटने वाली फर्मों की विशेष जांच


जल जीवन मिशन में 900 करोड की लूट मचाने वाली फर्में गणपति और श्रीश्याम फर्म की मुश्किले और बढेगी.क्योकि फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के जरिए टैंडर हासिल किए.कई रिकार्ड तो दफ्तरों से गायब है.इस घोटाले के बाद 200 करोड की फाइले भी गुम हुई थी.हालांकि जी मीडिया की खबर के बाद में गुम हुई फाइल एक दिन में मिल गई थी.इसके अलावा जयपुर में खोनागोरियान,सांगानेर और पीएआरएन में प्रोजेक्ट चल रहे है.मंत्री ने दोनों फर्मों की जांच के लिए विशेष निर्देश दिए थे.


फर्जी भुगतान की आशंका


लूट केवल इन्ही फर्मों ने नहीं मचाई,बल्कि जेजेएम के अलावा दूसरे प्रोजेक्ट्स की भी जांच होगी.जिसमें पाइप की क्वालिटी,लैब रिपोर्ट,मेंजरमेंट और भुगतान की गहनता से जांच की जाएगी.आशंका ये बनी हुई है कि गणपति और श्रीश्याम फर्म को कार्यों से पहले ही फर्जी भुगतान किया गया.इनकी गहनता से विभाग जांच करेगा.जयपुर रीजन ने जांच के लिए टीम का गठन किया है.जिसमें जयपुर नार्थ,साउथ,डिस्ट्रिक और प्रोजेक्ट के लिए टीमों का गठन किया है.इस संबंध में एडिशनल चीफ इंजीनियर अजय सिंह राठौड ने जारी किए है.अब ऐसे में देखना होगा कि इन जांचों के बाद कैसे दूध का दूध और पानी-पानी हो पाता है.


Reporter- Ashish Chauhan