Rajasthan News: जयपुर में नामी बिल्डर्स और आर्किटेक्चर्स की मुश्किलें बढने जा रही है, क्योंकि अब पिछले 5 साल में एक-एक बिल्डर्स और आर्किटेक्चर्स की जांच होगी. विशेष योग्यजन न्यायालय ने जेडीए सचिव को जांच कर 30 दिन में रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए. अब जांच इस बात की होगी कि क्या बिल्डर्स ने बिल्डिंग प्रोजेक्ट दिव्यांग फ्रेंडली बनाए है? क्या रेरा में पंजीकृत आर्किटेक्चर्स ने दिव्यांगजनों की सुविधा का ध्यान में रखते हुए एनओसी दी थी? विशेष योग्यजन आयुक्त उमाशंकर शर्मा ने 455 बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स की लिस्ट जेडीए को भेजी है. अब जेडीए को महीने भर में आर्किटेक्चर्स और बिल्डर्स की जांच कर लिस्ट कोर्ट को सौंपेगा. यदि दिव्यांगों के अनुरूप बिल्डिंग नहीं बनाई गई तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी.


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क्या कहते है नियम ?
मॉडल राजस्थान भवन विनियम 2020 के विनियम 14 के तहत सभी भवनों फ्लैट्स, प्रोजेक्ट्स में शारीरिक रूप से विशेष योग्यजन व्यक्तियों के लिए प्रावधान किए गए है. RPWD एक्ट 2016 के अंतर्गत विशेष योग्यजनों के लिए विशेष सुविधा होना जरूरी है. सभी बिल्डिंग्स दिव्यांग फ्रेंडली बनानी ही होगी. भारत ने विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए और इसके बाद 1 अक्टूबर, 2007 को इसे लागू किया गया.




अधिकतर भवनों में ये गायब


1. प्रवेश द्वार तक पथ समतल,सीढ़ियां-रहित और न्यूनतम 1800 एमएम चौडी नहीं.
2.ढलान अधिकतम 1:12,न्यूनतम चौड़ाई 9.0 मीटर से अधिक नहीं है.
3.सीढयों और रैंप के दोनों और रेलिंग नहीं,हैंड्रिल पृष्ठभूमि की दीवार,फर्श से रंग अलग अलग नहीं मिलते.
4.सीढ़ीदार पहुंच मार्ग के लिए पैडी 300 एमएम चौडी,पैडी की ऊंचाई न्यूनतम 150 एमएम या ज्यादा नहीं है.
5.सीढीवार प्रवेश मार्ग के दोनों तरफ 800 एमएम उंची रेलिंग गायब होती है.
6.गलियारों की न्यूनतम ऊंचाई 1500 एमएम,ऊंचा नीचा तल बनाए जाने की स्थिति में 1:12 ढाल वाले ढलान नहीं है.
7.सीढ़ियों की न्यूनतम चौड़ाई 1350 एमएम नहीं मिलती.
8.लिफ्ट,साइनेज,शौचालयों में सुविधाओं का अभाव रहता है.



धारा 40 और 44 समझना जरूरी
धारा 40 के नियमों के तहत बिल्डर्स को दिव्यांगजनों की सुविधाओं के अनुरूप बिल्डिंग बनाना जरूरी है. उनकी सुविधाओं को भवनों में शामिल करना आवश्यक है. धारा 44 कहती है कि यदि भवन बनाने में दिव्यांगजनों का ध्यान नहीं रखा, तो आर्किटेक्ट प्रोजेक्ट्स के लिए बिल्डर्स को एनओसी नहीं दे सकता. यदि ऐसा होता है तो वह नियमों को ताक रखकर एनओसी दी गई. इसलिए अब जयपुर के जिन बिल्डर्स और आर्किटेक्चर्स ने दिव्यांगजनों को ध्यान नहीं रखा अब उनके खिलाफ जेडीए और रेरा कार्रवाई करेगा.



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