Rajasthan Budget 2023: राजस्थान का बजट पेश होने में कुछ मिनट बाकी हैं. आज 10 फरवरी को  सीएम अशोक गहलोत 11 बजे पेश करेंगे. बजट पर पूरे प्रदेश की नजरें है. सीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बचत, राहत और बढ़त जैसे तीन शब्दों में अपने बजट का रहस्य जाहिर किया है. सरकार में वित्त मामलों के 5 टॉप अफसरों ने करीब 150 दिन तक मेहनत कर ये बजट तैयार किया है.सीएम गहलोत का ये आखिरी बजट है. इस बजट से आम आदमी को काफी उम्‍मीदें हैं. बता दें कि बजट की तैयारियां काफी पहले से शुरू हो जाती हैं. तमाम विचार विमर्श और कई सारी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद, जब बजट के दस्‍तावेजों को फाइनल रूप दे दिया जाता है, उसके बाद इन दस्‍तावेजों की सुरक्षा के लिए कड़ी व्‍यवस्‍था की जाती है. आइए आपको बताते हैं बजट से जुड़ी रोचक बातें.


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150 दिन में ये तैयार किया गया बजट 
1.सरकार में वित्त मामलों के 5 टॉप अफसरों ने करीब 150 दिन तक मेहनत कर ये बजट तैयार किया है. बजट के बेहद गोपनीय दस्‍तावेजों को तैयार करने के दौरान इसमें शामिल अधिकारी और कर्मचारी करीब 10 दिनों के लिए पूरी देश-दुनिया से कट जाते हैं.यहां तक कि उन्‍हें अपने घर में जाने की भी इजाजत नहीं होती. जब तक बजट पेश नहीं हो जाता, त‍ब तक इन लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर व्यवस्था चाक-चौबंद होती है. 


2. एक बार लॉक इन पीरियड शुरू होने के बाद कोई भी बाहरी व्‍यक्ति वित्‍त मंत्रालय में प्रवेश नहीं कर सकता. मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करता. इंटरनेट के इस्‍तेमाल पर पाबंदी रहती है. सिर्फ लैंडलाइन के जरिए ही बातचीत हो पाती है. 



3. इन 10 दिनों के बीच अगर कोई कर्मचारी बीमार पड़ जाए तो उसे अस्‍पताल में जाकर इलाज कराने की भी इजाजत नहीं होती है. लॉक इन पीरियड के दौरान मेडिकल सुविधाएं उपलब्‍ध कराने के लिए सभी सुविधाओं से लैस डॉक्‍टरों की टीम वहां पर मौजूद रहती है.


4. गोपनीय दस्‍तावेजों को किसी भी तरह की हैकिंग के रिस्‍क से बचाने के लिए जिन कंप्यूटरों पर बजट डॉक्यूमेंट मौजूद होता है, उनसे इंटरनेट और एनआईसी के सर्वर को डिलिंक कर दिया जाता है. ये कंप्‍यूटर सिर्फ प्रिंटर और छपाई मशीन से कनेक्‍ट होते हैं.


5. राजस्थान का पहला बजट आज से लगभग 70 साल पहले पेश किया गया था. मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल और वित्त मंत्री नाथूराम मिर्धा की अगुवाई में  प्रदेश का पहला बजट पेश किया गया था. लेकिन परंपरा के अनुसार उन्होंने खुद बजट पेश न करते हुए उस वक्त के वरिष्ठ नेता और वित्त मंत्री नाथूराम मिर्धा से पेश करवाया था, जो मात्र 17 करोड़ 25 लाख रुपये का था. राजस्थान के पहले बजट में मिर्धा ने जनता पर कोई टैक्स नहीं लगाया था और बजट की ज्यादातर घोषणाएं सिंचाई, पेयजल और सूखे से निपटने के साथ-साथ कानून व्यवस्था पर केंद्रित थीं.