UP Nagar Nikay Chunav Date 2023 : यूपी में रविवार को राज्‍य चुनाव आयोग की ओर से निकाय चुनाव को लेकर तारीखों की घोषणा कर दी गई. इसके बाद ही प्रदेश में आचार संहिता लागू हो गई है. राज्‍य चुनाव आयोग के मुताबिक, जिलों में महापौर और पार्षद के चुनाव ईवीएम (EVM) से कराए जाएंगे. वहीं, नगर पालिका परिषद और पंचायत के चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएंगे. तो आइये जानते हैं कि आचार संहिता लागू होने के बाद प्रदेश में क्‍या-क्‍या पाबंदियां लग जाएंगी. साथ ही कहां ईवीएम (EVM) और कहां बैलेट पेपर से होंगे चुनाव. 


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कहां EVM से तो कहां बैलेट पेपर से होंगे मतदान 
बता दें कि यूपी में करीब 762 नगर निकायों के लिए चुनाव होने हैं. इनमें नगर निगम की 17, नगर पालिका परिषद की 199 बाकी शेष नगर पंचायत की सीटें हैं. राज्‍य चुनाव आयोग के तहत प्रदेश में 17 महापौर और 1420 पार्षद के चुनाव ईवीएम से कराए जाएंगे. वहीं बाकी पदों पर चुनाव बैलेट पेपर से होगा. 


आम नागरिकों भी आते हैं जद में 
बता दें कि प्रदेश में आचार संहिता लागू होने के बाद कई गतिविधियों पर रोक लग जाती है. अगर आप सोच रहे हैं कि ये पाबंदियां सिर्फ चुनाव से लड़ने वाले प्रत्‍याशी, राजनीतिक दलों के लिए ही होती हैं तो आप गलत सोच रहे हैं. एक बार आचार संहिता लागू होने के बाद आम नागरिक भी इसके दायरे में आ जाता है. 


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क्‍या है चुनाव आचार संहिता 
किसी भी राज्य में चुनाव की घोषणा होते ही सभी पार्टियां अपनी कमर कस लेती हैं. इसी के साथ चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार भी जीतने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं. उम्मीदवार चुनाव जीतने के लिए कोई गलत हथकंडे न अपनाएं इसी के लिए आदर्श आचार संहिता लागू की जाती है. चुनाव की तारीखों का जैसे ही ऐलान होता है चुनाव संहिता लागू हो जाती है और नतीजे आने तक जारी रहती है. इसका मुख्य उद्देश्य प्रचार अभियान को साफ-सुथरा और निष्पक्ष बनाने का होता है. 


इन पर रहती है पाबंदियां
- सार्वजनिक उद्घाटन और शिलान्यास नहीं हो सकेंगे 
- किसी भी नए काम या योजना स्वीकृति पर मनाही
- सरकार अपनी उपलब्धियों के होर्डिंग्स नहीं लगा सकती
- सरकारी वाहनों से सायरन निकाल दिए जाते हैं 
- सरकारी भवनों में पीएम, सीएम, मंत्री, राजनीतिक व्यक्तियों की तस्वीरों पर होती है मनाही
- सरकार अपनी उपलब्धियों के विज्ञापन मीडिया में नहीं दे सकती
- रिश्वत लेना या देना माना जाएगा अपराध


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