Margashirsha Amavasya 2024 Date: मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन भगवान श्रीकृष्ण और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि आती है. पितरों की शांति और मोक्ष के लिए आर्यमा देव की आराधना करें. श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करें. यह दिन न केवल पितरों को तृप्ति देने के लिए, बल्कि परिवार की उन्नति और कष्टों को दूर करने के लिए भी महत्वपूर्ण होता है. इस साल मार्गशीर्ष माह की अमावस्या तिथि 30 नवंबर, शनिवार को सुबह 10:29 बजे से शुरू होकर 1 दिसंबर, रविवार को सुबह 11:50 बजे तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार, मार्गशीर्ष अमावस्या 1 दिसंबर को मनाई जाएगी. इस दिन पितरों का तर्पण, पिंडदान, दान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है.  


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मार्गशीर्ष अमावस्या पर किए गए पुण्य कर्म पितरों की कृपा दिलाते हैं. और जीवन में शुभता का संचार करते हैं।  


सुकर्मा योग का विशेष संयोग
इस बार मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन सुकर्मा योग रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है. सुकर्मा योग सुबह से शाम 4:34 बजे तक रहेगा. इसके बाद धृति योग शुरू होगा. साथ ही, अनुराधा नक्षत्र सुबह से दोपहर 2:24 बजे तक रहेगा, जिसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र आरंभ होगा.  


स्नान और दान का समय
ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:08 बजे से 6:02 बजे तक) और अभिजीत मुहूर्त (11:49 बजे से 12:31 बजे तक) के समय स्नान और दान करना विशेष फलदायी होगा. इस दिन सुबह स्नान के बाद भगवान सूर्य, श्रीकृष्ण और पितरों की पूजा करें. राहुकाल (शाम 4:05 बजे से 5:24 बजे तक) में शुभ कार्यों से बचें.   


पितरों का तर्पण और पिंडदान
पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद काले तिल और जल से पितरों का तर्पण करें. कुशा के पोरों का उपयोग करना शुभ माना जाता है. श्राद्ध और पिंडदान के लिए दिन में 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक का समय उपयुक्त रहेगा. 


Disclaimer: यहां बताई गई सारी बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं. इसकी विषय सामग्री और एआई द्वारा काल्पनिक चित्रण का जी यूपीयूके हूबहू समान होने का दावा या पुष्टि नहीं करता.


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