मेरठ: यूपी के मेरठ में इनोवेटर (Innovator) श्याम चौरसिया ने खास हाईटेक आर्मी दस्ताना बनाया है. ये दस्ताना हाथों को ठंड से तो बचाता है ही, साथ ही देश के दुश्मनों को सबक सिखाने में भी सक्षम है. कई खुबियों से लैस ये (Hitech army Gloves) हाथापाई में दुश्मनों को 4000 वोल्ट के झटके भी दे सकता है. इसके अलावा मुसीबत के समय जवान दस्ताने के माध्यम से कट्रोल रूम को संकेत भी भेज सकतें हैं. इतना ही नहीं इस हाईटेक दस्ताने की मदद से जवान अपनी बन्दूकों को 2 किलोमीटर दूर से दुश्मन की नजर में आए बिना उनपर गोला बरसा सकेंगे.


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आपको बता दें कि दस्ताना चार्जेबल होने के साथ रेड़िओ फ्रिक्वेंसी से भी लैस है. इसे बेहद खास तरीके से तैयार किया गया है. दस्ताने के दोनों हाथों की खूबियां अलग-अलग हैं. दाहिने हाथ के दस्ताने (Hitech army gloves left) में एक बटन होता है, जो आमने-सामने की हाथापाई या झड़प होने पर बेहद कारगर है. इसमें लगे बटन को दबाने पर दस्ताने के निचले और ऊपरी सतह पर 4000 वोल्ट का करंट दौड़ने लगता है, जो दुश्मनों को अच्छा सबक सिखाने में काम आएगा. (हाईटेक आर्मी दस्ताना बांया)


बाएं हाथ के दस्ताने की ये है विशेषता 
आपको बता दें कि दस्ताने के बाएं हाथ की खुबियां दाहिने हाथ के दस्ताने से अलग हैं. जैसे दाहिने हाथ के दस्ताने में दुश्मन के साथ हाथापाई के समय 4000 वोल्ट के करंट से सबक सिखा सकता है, वैसे ही बाएं हाथ के दस्ताने (Hitech army gloves left) में लगे रेड़िओ काट्रोलिंग सिस्टम की मदद से जवान अपनी बंदूक को दो किलोमीटर दूर से दुश्मन की नजर में आए बिना, उनपर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा सकता है. 


दरअसल, बाएं हाथ के दस्ताने में एक इमरजेंसी बटन भी लगा है, जो कंट्रोल रूम तक जवान के मुसीबत में पड़ने पर या घायल होने की दशा में मेडिकल मदद के लिए सिग्नल भी भेज सकता है. इस लेहज से ये दस्ताना जवानों के लिए बेहद कारगर साबित हो सकता है.


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अटल कम्युनिटी इन्नोवेशन सेंटर में तैयार हुआ ये दस्ताना
जानकारी के मुताबिक इस दस्ताने को मेरठ के एमआईईटी इंजिनियरिंग कॉलेज के अटल कम्युनिटी इन्नोवेशन सेंटर में तैयार किया गया है. इनोवेटर श्याम चौरसिया ने बताया कि इसे बनाने में तीन दिन का समय लगा है. वहीं, अगर बजट की बात करें, तो दस्ताने को बनाने में 8,500 रुपये का खर्च आया है. इसे बनाने में बेहतर लेदर, कैपिसीटर, नैनों रेडियों कंट्रोल, गियर मोटर, डायनमो 6 वोल्ट, स्विच, 3.7 वोल्ट बैटरी, का प्रयोग किया गया है. युवाओं के इस जज्बे को जी न्यूज का सलाम.


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