बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में एमडीएम घोटाले का मामला सामने आया था. जानकारी के मुताबिक बाराबंकी के 6.50 करोड़ रुपये के एमडीएम घोटाले में सात दोषियों को आज कोर्ट सजा सुना सकता है. जानकारी के मुताबिक बेसिक शिक्षा विभाग के दो कर्मचारियों समेत 7 लोगों को कोर्ट ने दोषी माना था. इसके बाद न्यायाधीश ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. आज सातों की सजा का ऐलान किया जा सकता है. आइए बताते हैं पूरा मामला.


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अपर सत्र न्यायाधीश आज करेंगे सजा का ऐलान 
आपको बता दें कि अपर सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार शुक्ल आज सजा का ऐलान करेंगे. दरअसल, तत्कालीन डीसी एमडीएम ने विभाग के कर्मचारियों और सहयोगियों के साथ मिलकर ये साजिश रची थी. उन्होंने दूसरों के खाते में एमडीएम के तकरीबन 6.50 करोड़ रुपये भेजकर डकार लिए थे. जब मामले की जांच तो तत्कालीन बीएसए वीपी सिंह ने जांच के दौरान पूरा मामला पकड़ा था.
इसके बाद तत्कालीन बीएसए ने 29 दिसंबर 2018 को नगर कोतवाली में मामला दर्ज कराया था.


दरअसल, कुछ माह से प्रशासन के एमडीएम में गड़बड़ी की शिकायत मिल रही थी. इसके बाद तत्कालीन डीएम उदयभानु त्रिपाठी ने बीएसए वीपी सिंह को इस मामले की जांच कराने के निर्देश दिए थे. इसके बाद बीएसए ने मामले की गुप्त रूप जांच शुरू की, तो वह हैरान हो गए. इसके बाद करोड़ो के घोटाले का पता चला.


घोटाले से मचा हड़कंप
आपको बता दें कि एमडीएम के जिला समन्वयक राजीव शर्मा ने अपने साथी रहीमुद्दीन के साथ मिलकर यह सारी रकम स्कूल के खातों में भेजने की बजाय निजी या चहेतों के खातों में भेज कर हड़प करता था. इस मामले में बीएसए ने पिछले साल 2022 में 29 दिसम्बर को कोतवाली में मामला दर्ज कराया. पुलिस ने इस मामले में 2 मुख्य आरोपी राजीव शर्मा और रहीमुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया. खास बात ये है कि साल 2013 से लगातार घोटाला होता रहा, लेकिन किसी अधिकारी को कानों कान खबर नहीं हुई.


उससे भी चौंकाने वाली बात ये है कि एमडीएम जिला समन्वयक राजीव शर्मा की संविदा समाप्त होने के बावजूद उससे काम लिया जाता रहा. जिला समन्वयक राजीव शर्मा ने अपने साथी रहीमुद्दीन जो कम्प्यूटर के एक्सपर्ट है, उसने बड़े ही शातिर तरीके से एमडीएम का 3 करोड़ 38 लाख अपने खाते में, 50 लाख अपनी गर्ल फ्रेंड, 42 लाख रुपये अपनी दूसरी गर्ल फ्रेंड के खाते में भेजा था. इसके अलावा 11 लाख रुपये किशन के खाते में ट्रांसफर कर लिया था. वहीं, इस घोटाले की जांच में पाया गया कि ये संगठित गिरोह है, जो आर्थिक अपराध का आदी हैं.