लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश लोकसभा चुनाव के नजरिए से काफी अहम है. इस चुनाव से पहले बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने पूरे देश में दलित वोट बैंक को साधने की कवायद के तहत 75 हजार अनुसूचित जाति तथा जनजाति के घरों तक पहुंचने की कवायद में जुटी हुई है. इसके लिए यूपी बीजेपी की ईकाई को भी लक्ष्य दिया गया है. दलितों में पैठ बनाकर बीजेपी अगले आम चुनाव में यूपी की 17 आरक्षित संसदीय सीटों पर अपने समीकरण दुरुस्त करना चाहती है.


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यूपी में दलित कनेक्ट के अभियान को दलित समुदाय में प्रभावी पैठ बनाने के लिए भाजपा की जोरदार कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. यूपी बीजेपी के मुताबिक अभी तक 75 जिलों में 300 से 400 गांवों में शिविर आयोजित करके 15,000 गांवों के लक्ष्य पहुंचने में पार्टी कामयाब हुई है. हालांकि जो लक्ष्य दिया गया था उसमें अभी इसकी संख्या ज्यादा है.


बीएसपी के वोटबैंक पर नजर


यूपी में अनुसूचित जाति बसपा प्रमुख मायावती का मुख्य वोट बैंक है. दलित समुदाय में लगभग 21 फीसदी मतदाता शामिल हैं और विशेष रूप से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण यूपी में किसी भी राजनीतिक दल के चुनावी भाग्य को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. पिछले लोकसभा चुनाव के नतीजे बताते हैं कि भाजपा और उसके सहयोगियों ने दलितों के लिए आरक्षित 17 संसदीय सीटों में से 15 पर जीत हासिल की है. बीएसपी ने केवल लालगंज और नगीना जीता था जिसने सपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था. उत्तर प्रदेश में भाजपा मिशन 80 सीटों का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है. बीजेपी ने पिछले चुनाव में यूपी मे 64 सीटें हासिल की थी. बाद में दो सीटों रामपुर और आजमगढ़ में उपुचनाव हुआ, जिसमें बीजेपी ने सपा को पटकनी दे दी. इस तरह बीजेपी के पास यूपी में अभी 66 लोकसभा सीटें हैं. लेकिन बीजेपी अगली बार इसे 80 तक पहुंचाना चाहती हैं इसलिए इस अभियान को इस कड़ी से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है.