लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा सारस को राज्य पक्षी का दर्जा दिया गया है. लगभग एक दशक पहले तक यह पक्षी विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गया था, जिसके बाद सरकार के द्वारा इसके संरक्षण के प्रयास किए गए. पुराने आकड़ों पर नजर डालें, तो पिछले एक दशक में सारस पक्षी का कुनबा 57% तक बढ़ गया है. 2012 में इनकी संख्या 11275 थी, जो 2021 में बढ़कर 17,665 पर पहुंच गई है. 


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सारस पक्षी
सारस उड़ने वाले पक्षियों में सबसे बड़ा पक्षी है. नर और मादा सारस जोड़े में रहकर अपना कुनबा बनाते हैं. इनके बीच में अटूट प्रेम होता है, अगर जोड़े में किसी एक सारस की किसी कारण से मौत हो जाती है, तो दूसरा सारस भी दम तोड़ देता है. सारस तालाब, पोखर और झीलों के किनारे की दलदली जमीन के साथ कृषि योग्य भूमि को अपना बसेरा बनाते हैं और खेतों के कीड़े मकोड़े से अपना भोजन करते है. इन्हें किसानों का मित्र भी माना जाता है.


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वर्ष 2012 से शुरू हुई नियमित गणना
प्रदेश में पहले सारस की नियमित गणना नहीं की जाती थी. वन विभाग ने वर्ष 2012 से साल में दो बार सारस की गणना शुरू की. इस गणना के लिए समय निश्चित होता है और एक ही समय में पूरे प्रदेश में गणना की जाती है.  कोरोना काल में वर्ष 2020 में गणना नहीं हो सकी थी. इस बार सारस की ग्रीष्मकालीन गणना 25 व 26 जून को की जाएगी. यह प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ कराई जाएगी. इस बार एनजीओ व कुछ स्कूली बच्चों को भी इसमें जोड़ा गया है. प्रत्येक स्थल पर गणना सुबह छह से आठ बजे एवं शाम को चार से छह बजे के बीच एक-एक बार की जाएगी. 


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यहां मिले सर्वाधिक सारस
इटावा- 3293
औरैया- 3293
मैनपुरी- 2737
शाजहांपुर- 1606
फर्रुखाबाद- 772
हरदोई- 690
सिद्धार्थनगर- 592
उन्नाव- 533
कानपुर देहात- 520


2012 से अब तक कितनी बढ़ी संख्या
2012- 11275
2013- 11977
2014- 12566
2015- 13332
2016- 14389
2017- 15110
2018- 15938
2019- 17586
2021- 17665


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