भारत ने गेहूं के निर्यात में रिकॉर्ड तोड़ते हुए अप्रैल से अक्टूबर 2022 के बीच 46.56 लाख टन गेहूं विदेशों में बेचा गया है, जो 1.5 अरब डॉलर मूल्य का रहा. जबकि वर्ष 2021-22 में इसी समय के दौरान 2.12 अरब डॉलर का गेहूं बेचा गया था.अगर बासमती चावल (basmati rice) की बात करें तो वर्ष 2022-23 के सीजन के पहले सात महीने में 24.10 लाख टन का निर्यात किया गया, जो 2.54 अरब डॉलर का था.


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केंद्रीय वाणिज्य एवं औद्योगिक मंत्री ने राज्यसभा में ये लिखित जानकारी दी. गौरतलब है कि भारत ने खाद्यान्न संकट की आशंका को देखते हुए मई में गेहूं निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी और सिर्फ चुनिंदा स्तर पर ही जहाजों की आवाजाही की इजाजत दी गई थी. फॉरेन ट्रेड पॉलिसी के तहत 186 निर्यातकों को गेहूं निर्यात की मंजूरी दी गई थी. लेकिन गेहूं के बढ़ते दामों के बाद 13 मई को इस पर रोक लगा दी गई थी. ताकि देश में गरीबों के लिए खाद्य सुरक्षा के साथ भारत पर निर्भर पड़ोसी देशों का ख्याल रखा जा सके. 


गौरतलब है कि खाद्यान्न उत्पादन में भारत लगातार पिछले कुछ सालों से नए रिकॉर्ड बना रहा है.उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश और हरियाणा देश के शीर्ष गेहूं उत्पादक राज्यों में शामिल हैं. किसानों को इस बार गेहूं की फसल के अच्छे दाम भी मिले हैं. कोरोना औऱ फिर यूक्रेन युद्ध के कारण रूस औऱ यूक्रेन में बड़े पैमाने पर गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है. इस कारण ये गेहूं के दामों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखने को मिली है.  


खाद्य सुरक्षा के तहत सरकार 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराती है. कोरोना काल के दौरान लोगों को प्रदेश औऱ केंद्र सरकार के स्तर पर दोहरा अनाज निशुल्क उपलब्ध कराया गया है. 31 दिसंबर के बाद भी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना लागू रहती है या नहीं, ये जल्द तय होगा.


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