महाभारत का युद्ध इतिहास में सबसे बड़े और विनाशकारी लड़ाइयों में से एक था.
इस युद्ध कई योद्धा ऐसे भी थे जिन्होंने अपने निजी स्वार्थ के लिए इस युद्ध में हिस्सा लिया था.
आज हम बात दो ऐसे योद्धाओं की कर रहे है, जो जिन्होंने एक दूसरे की पिता की मौत का बदला लेने के लिए महाभारत का युद्ध लड़ा.
हम बात करे है धृष्टद्युम्न और अश्वत्थामा की, जो अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने चाहते थे.
धृष्टद्युम्न पांचाल नरेश द्रुपद का पुत्र था, ये महाभारत के युद्ध के पांडवो की ओर से सेनापति भी रहे है.
महाभारत के युद्ध में द्रोण के हाथों राजा द्रुपद के तीन पौत्रों मारे गए थे. इस पर धृष्टद्युम्न ने द्रोण को मारने की शपथ ले ली.
श्रीकृष्ण की प्रेरणा से पांडवों ने द्रोण तक यह झूठा समाचार पहुँचाया कि अश्वत्थामा मारा गया है.
इतना सुनते ही द्रोण ने हथियार छोड़ दिए और इसका फायदा उठाकर धृष्टद्युम्न ने द्रोण के बाल पकड़कर सिर काट डाला.
द्रोण के वध से उनके पुत्र अश्वथामा बदले की आग भड़क उठी और उसने धृष्टद्युम्न को मारने का निश्चय किया.
महाभारत युद्ध के आखिरी दिन अश्वथामा ने प्रतिशोध वश रात को सोये हुए धृष्टद्युम्न को गला घोंट कर मार डाला