इजरायल vs ईरान: बारूद के ढेर को चिंगारी का इंतजार! युद्ध छिड़ा तो भारत क्या करेगा? 5 बड़ी बातें

Israel Iran War Possibility: बारूद के ढेर पर बैठे वेस्ट एशिया में कभी भी जंग छिड़ सकती है. ईरान और इजरायल के बीच सैन्य तनाव चरम पर है. ईरान ने 13 अप्रैल की रात को पहली बार, सीधे तौर पर इजरायल को निशाना बनाया था. दोनों देश एक-दूसरे के खून के प्यासे हैं. ईरान ने इजरायल पर शोलों की बारिश अपने सीनियर मिलिट्री ऑफिशियल्स की हत्या के जवाब में की थी. हालांकि, इजरायल ने अभी तक 1 अप्रैल को सीरिया के दमास्कस में एयर स्ट्राइक की जिम्मेदारी नहीं ली है. ईरान ने बदले की कसम खाई थी, 13 अप्रैल को उसका बदला पूरा हुआ. मगर अब इजरायल जवाब देने के मूड में है. इजरायल और ईरान में जंग की आहट को बाकी दुनिया महसूस कर पा रही है. अगर युद्ध छिड़ा तो एशिया में जो तबाही होगी, उसका असर ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर भी दिखेगा. शायद ही कोई देश ईरान-इजरायल युद्ध के असर से बच पाए. युद्ध की स्थिति में, भारत के लिए दोहरी चुनौती होगी क्योंकि उसके ईरान और इजरायल, दोनों देशों से मजबूत रिश्ते हैं.

दीपक वर्मा Tue, 16 Apr 2024-2:06 pm,
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Israel Iran Conflict : युद्ध की आहट से सहमी दुनिया

पश्चिमी एशिया के हालात पहले से ही तनावपूर्ण थे. 1 अप्रैल 2024 को हालात काबू से बाहर होते दिखे. दमास्कस स्थित ईरान की डिप्लोमेटिक बिल्डिंग पर हमला होता है. इस्लामिक रिपब्लिक गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कई सीनियर अधिकारी मारे जाते हैं. ईरान आरोप लगाता है कि हमला इजरायल ने किया. इजरायल जिम्मेदारी नहीं लेता. ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई 'बदला' लेने की कसम खाते हैं. बाकी दुनिया दम साधे वेस्ट एशिया के घटनाक्रम को देख रही है. अप्रैल का दूसरा हफ्ता शुरू होते ही पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियां चिंताजनक रिपोर्ट देती हैं. ईरान बड़े हमले की तैयारी कर रहा है. तमाम देश ईरान, इजरायल और उनसे सटे देशों के लिए एडवाइजरी जारी करते हैं.

13 अप्रैल 2024 की रात को ईरान हमला बोल देता है. सैकड़ों की संख्या में ड्रोन्स और मिसाइलें इजरायल की ओर दागी जाती हैं. यह अभूतपूर्व था. पहली बार ईरान ने सीधे इजरायल की जमीन पर हमला बोला था. अब तक दोनों देश एक-दूसरे से शैडो युद्ध करते आए थे. गनीमत रही कि इजरायल और उसके सहयोगियों ने 99% हमलों को नाकाम कर दिया. अमेरिका, यूके समेत तमाम देश इजरायल और ईरान से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं. लेकिन उन्हें भी यह अहसास हो चला है कि यह शैडो वॉर किसी वक्त भी फुल-स्केल वॉर में तब्दील हो सकता है.

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ईरान के हमलों का इजरायल कैसे जवाब देगा?

अभी सबसे बड़ा सवाल यही है और इसी पर काफी कुछ निर्भर करता है. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि, इजरायल कोई बड़ा कदम उठाने से हिचकेगा. यह हिचक हमले के बाद हुई वॉर कैबिनेट की बैठक में भी दिखी. इजरायल के साथ मजबूती से खड़ा रहने वाला अमेरिका भी बड़े मिलिट्री एक्शन के पक्ष में नहीं. उसने साफ कहा कि वह इजरायल के मिलिट्री रिस्पांस का भागीदार नहीं बनेगा. दुनिया पहले ही रूस-यूक्रेन युद्ध के असर से जूझ रही है. ऊपर से गाजा में भी इजरायल की कार्रवाई जारी है. 7 अक्टूबर, 2023 के हमले के बाद इजरायली एक्शन को जायज ठहराया गया था. लेकिन गाजा से आ रहीं रिपोर्ट्स ने कई पश्चिमी देशों को सुर बदलने पर मजबूर किया है.

अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को समझाने में लगे हैं. अगर इजरायल दबाव में आकर हमले का जवाब देता भी है तो कार्रवाई संतुलित होनी चाहिए. ईरान के अधिकतर ड्रोन और मिसाइल अपना निशाना भेदने में नाकाम रहे, इसके बावजूद उसने कहा कि उसकी कार्रवाई पूरी हो गई है. अपने बयान से ईरान ने साफ कर दिया कि वह मामले को और तूल नहीं देना चाहता. इजरायल सभी विकल्पों पर गौर कर रहा है, लेकिन डिप्लोमेसी का रास्ता भी खुला रखा है. संयुक्त राष्‍ट्र में इजरायली प्रतिनिधि ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग की.

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ईरान vs इजरायल: क्या भारत मदद कर सकता है?

भारत के लिए इजरायल और ईरान, दोनों अहम रणनीतिक साझेदार हैं. सरकार की पहली प्राथमिकता उस कार्गो शिप के 17 भारतीय क्रू मेंबर्स को छुड़ाना होगी जिसे IRGC ने UAE के तट पर सीज कर दिया था. इस जहाज को इजरायल से कनेक्शन के चलते सीज किया गया है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को ईरानी समकक्ष हुसैन अमीर से फोन पर बात की थी. अमीर ने भरोसा दिया कि ईरान जल्द ही भारतीय डिप्लोमेट्स को क्रू से मिलने देगा.

इजरायल और ईरान के बीच तनाव कम करने में भारत अहम भूमिका निभा सकता है. इजरायल, भारत के सबसे बड़े डिफेंस और सिक्योरिटी पार्टनर में से एक है. भले ही इजरायल के प्रति नई दिल्ली का रुख ज्यादा नरम माना जाता हो, लेकिन भारत अपने सिद्धांतों पर मजबूती से टिका रहा है. पिछले साल गाजा में सीजफायर की मांग करने वालों में भारत शामिल नहीं था. बाद में, संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव के समर्थन में वोट करके भारत ने मानवतावादी सीजफायर की वकालत की.

ईरान पर तमाम पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगा रखे हैं. इसके बावजूद, भारत और ईरान के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं. पिछले साल राष्ट्रपति सैय्यद इब्राहिम से मुलाकात में, पीएम नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के रिश्तों की अहमियत बयान की थी. अफगानिस्तान में आतंकवाद को पनपने से रोकना भी भारत और ईरान का साझा लक्ष्य है.

जयशंकर ईरान और इजरायल के विदेश मंत्रियों से पहले ही संयम बरतने की अपील कर चुके हैं. मोदी ने पिछले साल रईसी और नेतन्याहू, दोनों से बातचीत में गाजा के शांतिपूर्ण हल की जरूरत पर जोर दिया था. अगर ईरान और इजरायल के बीच हालात और बिगड़ते हैं तो कोई हैरान की बात नहीं अगर पीएम मोदी फिर दोनों नेताओं को फोन लगा दें.

पीएम मोदी ने 2022 में यूक्रेन से जंग शुरू करने वाले रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन को समझाने की कोशिश की थी. मोदी ने पुतिन से कहा था कि यह युद्ध का युग नहीं है. पीएम मोदी के रवैये की पूरी दुनिया में तारीफ हुई थी.

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ईरान-इजरायल में जंग का भारत पर असर

यूक्रेन-रूस की जंग का भारत पर उतना असर नहीं हुआ, लेकिन ईरान और इजरायल में संघर्ष से जरूर बड़ी परेशानी होगी. एनर्जी से लेकर कनेक्टिविटी तक, तमाम सेक्टर्स में भारत के हित इस इलाके से जुड़़े हैं. खाड़ी देशों के भीतर बड़ी संख्या में भारतीय बसे हैं. वे वहां से बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा भेजते हैं. असल में, वे भारत के लिए रेमिटेंस का सबसे बड़ा सोर्स हैं. 

भारत इन दिनों सस्ते रूसी तेल का आयात कर रहा है. इससे खाड़ी देशों से तेल के आयात में गिरावट आई है लेकिन वे अब भी सबसे बड़े और भरोसेमंद तेल-गैस सप्लायर्स में से एक हैं. भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है. अगर ईरान और इजरायल के बीच युद्ध हुआ तो तेल की कीमतें बढ़ेंगी. भारत और उसके जैसे अन्य खरीदार पहले से ही तेल की ज्यादा कीमतें चुका रहे हैं. 

भारत के लिहाज से, जंग का असर इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकॉनमिक कॉरिडोर पर भी पड़ेगा. इजरायल-हमास संघर्ष की वजह से इसमें पहले से ही देरी हो रही है. भारत जैसे देशों ने यूक्रेन युद्ध और ग्लोबल सप्लाई चेन ध्वस्त होने का खामियाजा भुगता है. ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ने से कई देशों के एयरस्पेस बंद हो जाएंगे. इससे विमानों के किराये में खासा उछाल आ सकता है क्योंकि एयरलाइंस को उन एयरस्पेस से बचकर निकलना होगा.

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