ISRO SpaDex Docking: इसरो के ज़रिए 30 दिसंबर 2024 को लॉन्च किया गया स्पेस डॉकिंग एक्सपेरीमेंट (SpaDeX) एक अभूतपूर्व मिशन है, जिसे अंतरिक्ष में दो अंतरिक्ष यान को डॉक करने के लिए जरूरी तकनीक और परीक्षण करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. डॉकिंग 7 जनवरी 2025 (लगभग सुबह 9.00 बजे से 10.00 बजे के बीच) के लिए तय है. इसमें दो छोटे उपग्रह- SDX01 (चेज़र) और SDX02 (टारगेट) शामिल होंगे, जो पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए एक साथ आएंगे. इसरो की तरफ से किए जा रहे यह प्रयोग मील के पत्थर जैसा है. इसको सफलता मिलते ही भारत को अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी मिल जाएगी. 


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डॉकिंग का दिन 7 जनवरी रखा गया है, हालांकि यह दिन यूं ही नहीं रख दिया गया है. इस तारीख का चुनाव बहुत सोच समझकर, सावधानीपूर्वक योजना के तहत किया गया है. इस तारीख का चुनाव एक सहज और सफल डॉकिंग को यकीनी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण चीजों को शामिल किया गया है. तो फिर आइए इसे आसान शब्दों में सझते हैं. 


सही समय और अंतरिक्ष स्थिति


दो अंतरिक्ष यान को डॉक करने के लिए अंतरिक्ष में उनकी स्थिति और रफ्तार बिल्कुल सही होनी जरूरी है. यहीं पर ऑर्बिटल डायनेमिक्स (अंतरिक्ष में चीजों की रफ्तार का अध्ययन) काम आता है. उपग्रहों को महफूज तरीके से जुड़ने के लिए सही रफ्तार और कोण पर एक दूसरे के पास आने व पूरी तरह से अलाइन होने की जरूरत होती है. 7 जनवरी को इसलिए चुना गया क्योंकि यह दिन इन सब जरूरतों के हिसाब से ठीक बैठ रहा है. यानी डॉकिंग के लिए आवश्यक सभी जरूरी परिस्थितियां इस दिन पूरी हो रही हैं, जिससे मिशन को कामयाबी का सबसे अच्छा मौका मिलता है.


ग्राउंड कंट्रोल सपोर्ट


इसरो के ग्राउंड स्टेशन, खास तौर पर बेंगलुरु के पीन्या में ISTRAC सुविधा, मिशन के प्रबंधन के लिए जरूरी हैं. ये स्टेशन सेटेलाइट्स को ट्रैक करते हैं, कमांड भेजते हैं और डॉकिंग सिस्टम के दौरान रियल टाइम में एडजस्टमेंट करते हैं. 7 जनवरी का दिन इस बात की भी यकीनी बनाता है कि ग्राउंड कंट्रोल टीम पूरी तरह से तैयार है और जरूरी मदद मुहैया करने के लिए उपलब्ध है, जो इस तरह के मुश्किल ऑपरेशन के लिए बेहद जरूरी है.


सूरज की रोशनी और बिजली


सूर्य के सापेक्ष सैटेलाइट के हालात, जिसे सोलर ओरिएंटेशन के रूप में जाना जाता है, एक और जरूरी चीज है. सैटेलाइट सेंसर, कम्युनिकेशन डिवाइस और कुछ अन्य डिवाइस समेत अपने सिस्टम को बिजली देने के लिए सूरज की रोशनी पर निर्भर करते हैं. 7 जनवरी को सौर परिस्थितियां जरूरत के मुताबिक बेहतर होंगी. इससे यह सुनिश्चित होगा कि सैटेलाइट्स के पास पर्याप्त बिजली है और डॉकिंग के दौरान उनके सिस्टम बिना गलती किए काम करेंगे. 


सावधानीपूर्वक योजना बनाना


इसरो की टीम ने उपकरणों का परीक्षण करने और हर संभावित परिदृश्य के लिए तैयारी करने में महीनों बिताए हैं. सफल मिशन के लिए सभी चीजें ठीक से होने को सुनिश्चित करने के लिए गहन विश्लेषण और तैयारी के बाद 7 जनवरी को डॉकिंग की तारीख के रूप में चुना गया.


स्पेस टेक्नोलॉजी में भारत के लिए बड़ी छलांग


SpaDeX सिर्फ एक परीक्षण से कहीं ज्यादा है. यह अंतरिक्ष अन्वेषण (Space Probes) में भारत के लिए एक बड़ा कदम है. अंतरिक्ष यान को सफलतापूर्वक कक्षा में डॉक करना एक चुनौतीपूर्ण काम है. जिसे सिर्फ कुछ ही देशों ने हासिल किया है. यह मिशन इसरो की बढ़ती विशेषज्ञता को जाहिर करता है और भविष्य की परियोजनाओं के लिए आधार तैयार करता है. जैसे कक्षा में उपग्रहों को ईंधन भरना या अंतरिक्ष संरचनाओं को इकट्ठा करना. 7 जनवरी का दिन कामयाबी के लिए सबसे बेहतरीन परिस्थितियों को देखकर चुना गया है.