जेनेवा: डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडहोम घेब्रेयसिस ने कहा है कि "वायरस से लड़ने के लिए इस समय कोई कारगर दवा (silver bullet) नहीं है और ना ही कभी हो सकती है".


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टेड्रोस ने कहा, 'कई वैक्‍सीन क्‍लीनिकल ट्रायल के तीसरे चरण में है और हम सभी को उम्‍मीद है कि प्रभावी संख्‍या में टीके उपलब्‍ध होंगे जो लोगों को संक्रमण से बचाने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, इस समय इससे बचने के लिए कोई silver bullet नहीं है.'


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डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने बताया कि कोविड​​-19 पर आपातकालीन समिति ने महामारी पर समीक्षा की थी. टेड्रोस ने कहा कि समिति ने यह पाया था कि वायरस के कारण स्वास्थ्य पर आए असर ने अन्य बीमारियों के लिए सेवाओं को एक सीमा पर रोक दिया था. इसमें टीकाकरण, कैंसर स्क्रीनिंग और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में आई कमी शामिल थी.


टेड्रोस ने कहा, 'दुनिया के आधे से ज्‍यादा देशों ने प्रसवपूर्व देखभाल की सेवाओं में रूकावट आने की सूचना दी. वहीं एक तिहाई से अधिक देशों ने प्रसव सेवाओं में व्यवधान पैदा होने की बात कही. '


टेड्रोस ने उल्लेख किया कि कुछ देशों ने मामलों को लेकर सबसे बुरी वृद्धि दर झेली और जहां मरीज बड़ी संख्‍या में ठीक हुए, वे अब फिर से मामलों की संख्‍या में तेजी देख रहे हैं. आपातकालीन समिति ने स्वीकार किया है कि सदस्य राज्यों के पास महामारी को खत्‍म करने के विकल्‍प बहुत मुश्किल भरे हैं.


डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने यह भी कहा कि चीन के वुहान में महामारी के अध्ययन की शुरुआत होगी, जो कि कोविड ​​-19 के शुरुआती मामलों में 'संक्रमण के संभावित स्रोत' की पहचान करेगा. इसके जरिए आगे के अध्ययन के लिए जमीन तैयार होगी.


चीन की यात्रा करके आई डब्ल्यूएचओ की एडवांस टीम ने वायरस की उत्पत्ति की पहचान करने के लिए आगे के संयुक्त प्रयास करने के लिए जमीनी कार्य करने के अपने मिशन को हाल ही में खत्‍म किया है.


उन्‍होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ और चीनी विशेषज्ञों ने डब्ल्यूएचओ के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय टीम के लिए अध्ययन और कामों के लिए तय की जाने वाली शर्तों का मसौदा तैयार किया है. बता दें कि इस अंतरराष्ट्रीय टीम में चीन और दुनिया भर के प्रमुख वैज्ञानिक और शोधकर्ता शामिल होंगे.


इसी बीच डब्ल्यूएचओ के आपातकालीन प्रमुख माइक रेयान ने कहा कि ब्राजील और भारत सहित कई देशों को एक लंबी लड़ाई के लिए तैयार किया गया है.