Singapore Drug Trafficking Law: सिंगापुर ने ड्रग्स की तस्करी के जुर्म में गुरुवार को एक कैदी को फांसी की सजा दी. यह दो हफ्तों में फांसी दिए जाने का तीसरा मामला है. सेंट्रल नारकोटिक्स ब्यूरो ने एक बयान में बताया कि सिंगापुरी नागरिक 39 वर्षीय मोहम्मद शालेह अब्दुल लतीफ को कानून के तहत उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद चांगी जेल में फांसी दी गई.


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बयान में कहा गया है कि उसे 54 ग्राम हेरोइन की तस्करी करने के जुर्म में 2019 में मौत की सजा सुनाई गई थी, उसकी अपील पिछले साल खारिज की गयी.


सिंगापुर में मृत्युदंड विरोधी, ट्रांसफॉर्मेटिव जस्टिस कलेक्टिव ग्रुप ने कहा कि एक शालेह ने 2016 में अपनी गिरफ्तारी से पहले एक डिलीवरी ड्राइवर के रूप में काम किया था. उसे 2019 में सजा सुनाई गई थी लेकिन उसकी अपील पिछले साल खारिज कर दी गई थी.


ग्रुप ने कहा कि शालेह ने अपने मुकदमे में कहा था कि उसका मानना ​​है कि वह अपने एक दोस्त के लिए प्रतिबंधित सिगरेट पहुंचा रहा था, जिस पर उसका पैसा बकाया था, लेकिन उसने बैग की सामग्री का सत्यापन नहीं किया क्योंकि उसे अपने दोस्त पर भरोसा था.


जज ने नकारी शालेह की दलीलें
हालांकि हाई कोर्ट के न्यायाधीश ने फैसला सुनाया कि उनके संबंध इतने घनिष्ठ नहीं थे कि उस तरह के विश्वास की गारंटी दी जा सके जैसा शालेह ने अपने मित्र के प्रति होने का दावा किया था. हालांकि अदालत ने पाया कि वह महज एक कूरियर था. शालेह को अनिवार्य मौत की सजा दी गई क्योंकि अभियोजकों ने उसे उनके साथ सहयोग करने का प्रमाण पत्र जारी नहीं किया था.


कोविड के दौरान रोक दी गई थी फांसी
सिंगापुर में कोविड-19 महामारी के कारण दो साल के अंतराल के बाद मार्च 2022 में फांसी की सजा देनी फिर से शुरू की गयी. इस साल फांसी दिए जाने का यह पांचवां और मादक पदार्थ संबंधी अपराध में फांसी देने का 16वां मामला है.


क्या कहता है कानून?
सिंगापुर के कानून में 500 ग्राम (17.6 औंस) से अधिक गांजा और 15 ग्राम (0.5 औंस) हेरोइन की तस्करी के दोषी किसी भी व्यक्ति के लिए मौत की सजा का प्रावधान है.


पिछले सप्ताह दो अन्य नागरिकों को फांसी दी गई
45 वर्षीय सारिदेवी जामानी,  लगभग 31 ग्राम (1 औंस) हेरोइन की तस्करी के लिए 19 वर्षों में शुक्रवार को फांसी पाने वाली पहली महिला थीं. 56 वर्षीय मोहम्मद अजीज हुसैन को लगभग 50 ग्राम (1.75 औंस) हेरोइन की तस्करी के आरोप में दो दिन पहले फांसी दी गई थी.


(इनपुट – न्यूज एजेंसी- भाषा)