नई दिल्ली: RSS Dussehra Vijayadashami Connection: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के लिए विजयादशमी यानी दशहरे का दिन साल का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है. इसका कारण ये है कि विजयादशमी कार्यक्रम के दिन ही  साल 1925 में RSS की नागपुर में स्थापना हुई थी. तब डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने RSS की स्थापना की थी. इसके बाद से ही RSS विजयादशमी के दिन बड़ा उत्सव करती है. 


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5 स्वयंसेवकों के साथ पहली शाखा
साल 1925 में 27 सितंबर को दशहरा था. तभी तारीख को मोहिते के बाड़े नाम की जगह पर डॉ. हेडगेवार ने RSS की नींव रखी. ये संघ की पहली शाखा थी. इसकी शुरुआत मात्र पांच स्वयंसेवकों के साथ हुई थी. आज RSS के लाखों स्वयंसेवक हैं. विजयादशमी पर बड़ा उत्सव होता है.


RSS प्रमुख मोहन भागवत का संबोधन
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी पर अपने संबोधन में कहा- हिंदुओं को संगठित और सशक्त रहने की जरूरत है. दुर्बल रहना अपराध है. बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार किया जा रहा है, वहां के अल्पसंख्यकों पर खतरा मंडरा रहा है. बांग्लादेश में हिंदू समाज पहली बार संगठित होकर खुद को बचाने घर से बाहर निकला, तब जाकर थोड़ा बचाव हो पाया. असंगठित रहना दुष्टों के अत्याचारों को निमंत्रण देने जैसा है. दुनियाभर के सारे हिंदुओं को ये समझना चाहिए. बता दें कि इस दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन भी किया


RSS क्यों करता है शस्त्र पूजन?
विजयादशमी पर संघ की शाखाओं में शक्ति के महत्व को याद रखने के शस्त्र पूजन किया जाता है. जैसे कुछ इलाकों में आज भी क्षत्रिय इस दिन शस्त्र पूजा करते हैं, ठीक वैसे ही संघ के सदस्य भी हवन में आहुति देने के बाद विधि-विधान के साथ शस्त्रों की पूजा करते है. इस दौरान ये भी बताया जाता है कि शस्त्र धारण करना कब जरूरी है. बताया जाता है कि राक्षसी प्रवृत्ति के लोगों के नाश के लिए शस्त्र धारण करना चाहिए. 


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