World Economic Forum Net-Zero Industry Tracker 2023 report: अधिक टिकाऊ और कार्बन-तटस्थ भविष्य की तरफ कदम बढ़ाने के लिए वर्ष 2050 तक उत्पादन, ऊर्जा और परिवहन क्षेत्रों में 13.5 लाख करोड़ डॉलर के व्यापक निवेश की जरूरत पड़ेगी. विश्व आर्थिक मंच (Wef) की एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया. मंगलवार को जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत, चीन, अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख उत्पादक देश एवं क्षेत्रों ने अब शुद्ध रूप से शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य के लिए प्रतिबद्धता जताई है. ऐसे में वहां पर मौजूद कारोबारों के लिए अपने परिचालन एवं रणनीतियों का बदलते हुए नियामक परिदृश्य के साथ सामंजस्य बिठाना अनिवार्य हो गया है.


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हालांकि रिपोर्ट कहती है कि जटिल और लगातार बदलती नीतिगत प्रणालियों की वजह से कारोबारों को अनुपालन के लिए पर्याप्त संसाधन आवंटित करने पड़ते हैं जो प्रगति को बाधित करता है. लिहाजा इन जोखिमों को कम करने के लिए एक तय समयसीमा के साथ अधिक सुसंगत और स्थिर नियामकीय ढांचे बनाने जरूरी हैं.


इस रिपोर्ट में ग्रीनहाउस गैस का 40 प्रतिशत वैश्विक उत्सर्जन करने वाले आठ उद्योगों की शुद्ध रूप से शून्य उत्सर्जन की दिशा में प्रगति का जायजा लिया गया है. इसके मुताबिक, स्वच्छ ऊर्जा, स्वच्छ हाइड्रोजन और औद्योगिक ठिकानों के नजदीक कार्बन उत्सर्जन रोकने के लिए वैश्विक वित्त पोषण और मजबूत नीतिगत प्रोत्साहन की जरूरत है.


एक्सेंचर के सहयोग से प्रकाशित इस रिपोर्ट में इस्पात, सीमेंट, एल्यूमीनियम, अमोनिया, तेल एवं गैस, विमानन, जहाजरानी और ट्रक परिवहन उद्योगों का विश्लेषण किया गया है. ये उद्योग अपनी 90 प्रतिशत ऊर्जा मांग को जीवाश्म ईंधनों से पूरा करते हैं. रिपोर्ट कहती है कि भारत और चीन जैसे देशों में व्यापक औद्योगिक रूपांतरण में मददगार हाइड्रोजन मूल्य श्रृंखला में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए स्वच्छ हाइड्रोजन वाली कार्य योजनाओं को अपनाया गया है.


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