राकेश मल्ही/ऊना: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल (Governor of Himachal Pradesh) ने रविवार को जिला परिषद सभागार ऊना में जिला प्रशासन के साथ केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Scheme) और जिला स्तर पर कार्यान्वित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की. इस दौरान उन्होंने केंद्र व प्रदेश सरकार की विभिन्न विकासात्मक योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट मांगी. इसके साथ ही प्राकृतिक कृषि (Natural farming), नशामुक्ति और मोटा अनाज की खेती के बारे में अधिकारियों से जागरूकता पर कार्य करने की अपील की. 


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लोगों को जागरूक करना अधिकारियों का दायित्व 
राज्यपाल ने कहा कि जिला स्तर पर जो अधिकारी केंद्रीय व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओें को कार्यान्वित कर रहे हैं उनके कार्यो से प्रदेश सरकार को श्रेय मिलता है, इसलिए उन्हें न केवल निर्धारित समयावधि में कार्य पूरा करना चाहिए, बल्कि उसमें गुणात्मकता का भी ध्यान रखना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि लोगों को सरकार की योजनाओं के बारे में जागरूक करने का दायित्व भी इन्हीं अधिकारियों का है. ये सभी अधिकारी इन योजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए मुख्य आधार हैं.


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कैसे हो सकती है कोई योजना बेहतर? 
उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं को कार्यान्वित करने से पूर्व अधिकारी स्वयं इन योजनाओें से संतुष्ट होने चाहिए तभी वे समर्पण से कार्य कर पाएंगे. उन्होंने कहा कि अगर जनता को किसी भी योजना का लाभ मिल रहा है तो उस पर दृढ़ता से काम होना चाहिए और अगर किसी भी योजना में कहीं पर कोई भी कमी है तो इस बारे में भी सरकार को अवगत करवाने का सामर्थ्य भी होना चाहिए तभी कोई व्यवस्था बेहतर होगी. इसके अलावा  उन्होंने अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि फिलहाल जिले के अनेकों विभागों का कार्य संतोषजनक ढंग से हो रहा है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य के प्रति अधिकारियों में भी उत्साह नजर आना चाहिए, तभी कोई कार्य बेहतर ढंग से हो सकता है.


युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए हों बेहतर सुविधा 
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल को देवभूमि कहा जाता है. देवभूमि में नशे के अवैध धंधे के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए. नशा केंद्रों में अच्छी सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि यहां आने वाले युवाओं को जल्द से जल्द ठीक किया जा सके और वे स्वस्थ हो सकें. नशे के खिलाफ पूरे समाज को मिलकर कार्य करना है, क्योंकि नशे का किसी एक शख्स या एक परिवार पर नहीं बल्कि पूरे समाज पर गलत प्रभाव पड़ता है. 


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रसायन खेती से जमीन हो रही बंजर
उन्होंने कहा कि आज रसायनिक खेती से जमीन बंजर होती जा रही है और अब जो अन्न पैदा हो रहा है वह भी स्वास्थ्य की दृष्टि से नुकसानदायक है, इसलिए हमें किसानों को प्राकृतिक कृषि के प्रति प्रेरित करने की आवश्यकता है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभिन्न योजनाओें के लिए स्वीकृत राशि का ठीक से उपयोग करें और काम की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें. अगर हम इस पर ध्यान देंगे तो प्रदेश को प्रगति करने से काई रोक नहीं पाएगा.


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