End presence of US troops: इराक के जॉइंट ऑपरेशन कमांड (JOC) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या रसूल ने इतवार को कहा कि "इराक सरकार अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन से जुड़े विदेशी सैनिकों की तैनाती को ख़त्म करने के लिए प्रतिबद्ध है". आपको बता दें कि ये जॉइंट ऑपरेशन कमांड मूल रूप से ISIS से निपटने के लिए बनाया गया था. याह्या रसूल ने आगे कहा,  "इराकी सरकार देश में विदेशी सेनाओं की तैनाती को खत्म करने के लिए संजीदा है. इस काम के लिए इराकी सरकार ने स्टेप वाइज़ प्लान तैयार किया है, जिसमें अमेरिकी सेना की वापसी और उसके बाद सुरक्षा और सैन्य मदद के लिए जांइट टेक्निकल एक्टिविटी शामिल हैं." 


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इराक की सुरक्षा और स्टेबिलिटी के लिए अमेरिका की वापसी ज़रूरी 
गाज़ा वॉर शुरू होने के बाद इराक में मौजूद अमेरिकी सेना के अड्डों पर कई हमले हुए हैं. इराक की आम जनता पहले से अमेरिकी सेना की वापसी की मांग करती आ रही है. याह्या रसूल ने ये भी कहा कि इराक में अमेरिका के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन की अब ज़रूरत नहीं है, अब इराक सेना अकेले आतंकवाद के खिलाफ़ लड़ सकती है. अमेरिका की वापसी को लेकर गुरुवार को इराकी प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने जॉइंट ऑपरेशन कमांड की वापसी के लिए अह्वान किया था. इराकी प्रधानमंत्री ने स्विट्जरलैंड के दावोस में एक TV शो के दौरान कहा, अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन मिशन का खत्म होना इराक की सुरक्षा और स्थिरता के लिए ज़रुरी है. इसके अलावा ये इराक और गठबंधन देशों के बीच के रिश्तों के लिए भी ज़रूरी है. 


2020 से हो रही वापसी की मांग 
मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने कई बार विदेशी सैनिकों के इराक छोड़ने की इच्छा ज़ाहिर की है. 3 जनवरी, 2020 को बगदाद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास अमेरिकी ड्रोन हमले में शीर्ष ईरानी कमांडरों की हत्या के बाद इराक ने विदेशी बलों को निकालने के लिए एक कानून पास किया था. बता दें कि ड्रोन हमले में शहीद होने वाले जनरल कासिम सुलेमानी और अबू महदी अल-मुहांडिस दोनों आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व करने वाले टॉप व्यक्ति थे. जिसके बाद इराक से विदेशी सेनाओं की वापसी के लिए नए सिरे से आह्वान शुरू हो गया.