Iran Election: ईरान के राष्ट्रपति इलेक्शन के शुरुआती नतीजों में देश के सुप्रीम लीडर के करीबी सईद जलीली आगे चल रहे हैं. जबकि उदारवादी मसूद पेजेशकियन दूसरे नंबर पर चल रहे हैं. देश में राष्ट्रपति इलेक्शन के लिए 28 जून को वोटिंग हुई थी. ईरान की सरकारी टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, जलीली सीधे तौर पर जीतने की हालात में नहीं हैं. इस वजह से दूसरे फेज में इलेक्शन हो सकता है. 


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सबसे आगे हैं जलीली
28 जून को हुए इलेक्शन के अब तक गिने गए 10.3 मिलियन से ज्यादा वोटों में से कट्टरपंथी पूर्व परमाणु वार्ताकार जलीली ने 4.26 मिलियन से अधिक वोट मिले हैं और विपक्षी उम्मीदवार उदारवादी सांसद मसूद पेजेशकियन को लगभग 4.24 मिलियन वोट मिले हैं, आंतरिक मंत्रालय के अधिकारी मोहसेन इस्लाम ने यह जानकारी दी है.


40 फीसद हुई है वोटिंग
कुछ अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि मतदान लगभग 40 फीसद था, जो ईरान के मौलवी शासकों के जरिए अपेक्षित से कम था, जबकि गवाहों ने रॉयटर्स को बताया कि तेहरान और कुछ दूसरे शहरों में मतदान केंद्रों पर भीड़ नहीं थी. 


ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी ने कहा कि हेलीकॉप्टर दुर्घटना में इब्राहिम रईसी की मौत के बाद अगले राष्ट्रपति को चुनने के लिए दूसरे फेज के इलेक्शन की "बहुत संभावना"है. यह इलेक्शन इजरायल और ईरानी सहयोगियों गाजा में हमास और लेबनान में हिजबुल्लाह के बीच युद्ध की वजह से क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के साथ-साथ ईरान पर उसके तेजी से बढ़ते परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी दबाव के साथ मेल खाता है.


सुप्रीम लीडर को हो सकते हैं प्रभावित
हालांकि चुनाव से इस्लामिक गणराज्य की नीतियों में कोई बड़ा बदलाव आने की संभावना नहीं है, लेकिन इसका रिजल्ट साल 1989 से सत्ता में काबिज ईरान के 85 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के उत्तराधिकार को प्रभावित कर सकता है. अगले राष्ट्रपति से ईरान के परमाणु कार्यक्रम या मध्य पूर्व में मिलिशिया समूहों के समर्थन पर कोई बड़ा नीतिगत बदलाव लाने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि खामेनेई शीर्ष राज्य मामलों पर सभी फैसले लेते हैं.


कौन हैं सईद जलीली?
राष्ट्रपति चुनाव में सबसे आगे चल रहे सईद जलीली राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के पूर्व सचिव रहे चुके हैं. वह मुल्क के प्रमुख परमाणु वार्ताकार भी रह चुके हैं. उन्होंने पश्चिमी देशों और ईरान के बीच परमाणु हथियारों को लेकर हुई अहम बातचीत में अहम भूमिका निभाई थी. उनकी पहचना कट्टरपंथी नेता के रूप में होती है. वो सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामनेई के काफी करीबी हैं.