Islamic Knowledge: इस्लाम में अपने आस-पास के सभी लोगों से अच्छे ताल्लुकात रखने के बारे में बताया गया है. इस्लाम में इस बात पर जोर दिया गया है कि अपने साथियों के साथ अच्छे ताल्लुक रखो. उन पर भरोसा करो. उनके बारे में अगर कोई बुराई करे तो उस पर यूं ही भरोसा न कर लो. पहले उसकी तस्दीक करो उसके बाद उस पर कोई फैसला लो. इस्लाम में अपने साथियों के साथ इसलिए ताल्लुक अच्छे करने के बारे में बताया गया है क्योंकि वह आपके साथी ही हैं, जो मुसीबत में आपके काम आएंगे. इसलिए उनसे ताल्लुक अच्छे रखो.


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साथियों पर हदीस
एक हदीस में इरशाद है कि "हजरत अबदुल्लाह इब्ने मसऊद कहते हैं कि प्रोफेट मोहम्मद स0. ने फरमाया: मेरे साथियों में से कोई अपने किसी साथी के बारे में मुझे कुछ न बताए. मैं चाहता हूं कि (तरबियत के लिए) मैं तुम्हारे पास इस हाल में आऊं कि मेरा मन गलत जजबात से पाक-साफ हो."


बिना जानकारी के कोई बात न फैलाई जाए
इस हदीस का मतलब यह है कि प्रोफेट मोहम्मद स0. का कहना है कि कोई भी शख्स मेरे साथियों के बारे में कुछ न कहे, क्योंकि वह मेरे साथी हैं. अगर मेरे किसी साथी के बारे में कुछ बताया गया, तो मैं उसका असर लिए बिना नहीं रह सकूंगा. हो सकता है कि उसके बारे में कोई बात मेरे अंदर घर कर जाए. इसलिए बिना छानबीन के मेरे साथी के बारे में कोई बात न फैलाई जाए. 


कमी अकेले में बताओ
इस्लाम में इस बात पर जोर दिया गया है कि किसी अगर किसी शख्स के बारे में कोई बात पता चले या उसके बारे में कोई कमजोरी नजर आए तो तन्हाई में हमदर्दी के साथ उसके बारे में बताओ, उनकी कमी को दूर करने के बारे में बताओ. अगर आपके टोकने और याद दिलाने के बावजूद वह ध्यान न दें, तो मामले को आगे बढ़ाओ. जिम्मेदारों की जानकारी में वह बात लाओ.


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