Islamic Knowledge: इस्लाम में हर किसी के हक के बारे में बात की गई है. इसी तरह से यतीमों (जिनके मां-बाप गुजर गए) का भी हक है. इस्लाम में इस बात पर जोर दिया गया है कि औरतों और यतीमों के हक की हिफाजत करो. प्रोफेट मोहम्मद (स.) ने फरमाया है कि अगर तुम उनके हक अदा न कर सकोगे तो तुम अपने नबी की नाफरमानी और तौहीन करोगे. इसके अलावा प्रोफेट मोहम्मद (स.) ने यह भी कहा है कि जो यतीमों का सरपरस्त बनेगा वह मेरे साथ जन्नत में रहेगा.


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यतीमों पर हदीस


एक हदीस में जिक्र है कि "खुवैलिद इब्ने-अम्र (र.) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (स.) ने फरमाया: ऐ अल्लाह! मैं इन कमजोरों: यतीमों और औरतों के हक को मोहतरम ठहराता हूं." (हदीस: नसई)


सहल इब्ने-साद (र.) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (स.) ने फरमाया: मैं और यतीम का सरपरस्त और दूसरे ऐसे ही बेसहारा लोगों का सरपरस्त मैं और वह दोनों जन्नत में पास-पास रहेंगे. यह कहकर आप (स.) ने बीच की उंगली और शहादत की उंगली लोगों को दिखाकर बताया कि मैं और ये सरपरस्त जन्नत में इतने करीब रहेंगे. यह कहते वक्त आप (स.) ने दोनों उंगलियों के बीच में जरा फासला रखा.


यतीमों पर अहम बातें


इस्लाम में इस बात का जिक्र है कि अगर आपके मातहत कोई भी यतीम है और उसके नाम जायदाद है, तो उसकी जायदाद उसके बड़े होने से पहले न खर्च कर डालो.
एक हदीस में जिक्र है कि यतीमों को न मारो. अगर उन्हें गलती पर मारना है तो उतना ही मारना जितना अपनी औलाद को मारोगे या उसे सजा दोगे.
एक जगह जिक्र है कि अगर आप किसी यतीम के सिर पर हाथ फेर देते हैं तो अल्लाह ताला इसका भी अज्र आपको देंगे.
बताया जाता है कि अगर आप यतीमों को पढ़ाई के लिए फीस देते हैं तो आपको इसका अज्र मिलता है.
इस्लाम में बताया गया है कि जो लोग यतीम हों, उन पर रहम करो. जो लोग यतीमों के सरपरस्त बन जाते हैं, वह जन्नत में प्रोफेट मोहम्मद (स.) के साथ-साथ रहेंगे.