Rajasthan Assembly Election 2023: राजस्थान में 30 सालों से चला आ रहा रिवाज फिर से बरकरार रहा. अब कांग्रेस के बाद फिर से भारतीय जनता पार्टी की सत्ता में वापसी हो रही है. कांग्रेस और सीएम अशोक गहलोत के तमाम दावे और उनके लुभावने वादों को राजस्थान की जनता ने नकार दिया और पुराने रिवाज को कायम रखते हुए बीजेपी को झोली भरकर वोट किया.


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बीजेपी राजस्थान में लगभग एक तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाती हुई दिख रही हैं, तो वहीं कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ रहा है. भाजपा को लगभग 116 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं, तो वहीं कांग्रेस सिर्फ 68-70 सीटों पर सिमट सकती है. लेकिन कांग्रेस और अशोक गहलोत सरकार से कहां चूक हो गई और हार की क्या वजह रही हैं? आइए जानते हैं इन पांच प्वाइंट्स के जरिए. 


पार्टी की अंदरूनी कलह
राजस्थान में कांग्रेस की इतनी बड़ी हार की सबसे बड़ी वजह पार्टी में अंदरूनी कलह रही. कई नेता पार्टी से नाराज थे लेकिन फिर भी गहलोत ने उन नेताओं का सही तरीके से हैंडल नहीं किया. पार्टी के अंदर कई गुटें और बागी नेताओं ने कांग्रेस का खेल बिगाड़ दिया. यहां तक कि कई बागी नेताओं ने निर्दलीय ही चुनावी अखाड़े में ताल ठोक दी तो कईयों ने बीजेपी को समर्थन कर दिया.


गहलोत और सचिन की लड़ाई 
सचिन पायलट और अशोक गहलोत की लड़ाई गाहे बगाहे राजनीति गलियारों में चर्चा का मुद्दा रही है. दोनों नेता की ये आपसी लड़ाई पिछले विधानसभा चुनाव से जारी है. कई बार तो कांग्रेस आलाकमान को भी दोनों के झगड़े को सुलाझाना पड़ा. दोनों के बीच बढ़ती खाई को राहुल गांधी ने भी मंच के माध्य से मैसेज दिया ताकि पार्टी में सबकुछ ठीक हो जाए.   


महिलाओं के खिलाफ बढ़ती घटनाएं
राजस्थान इलेक्श में लॉ एंड ऑर्डर बहुत बड़ा मुद्दा बना रहा. महिलाओं के खिलाफ बढ़ती लगातार अपराधिक घटनाएं, जिसको लेकर भाजपा कांग्रेस को किसी भी मौके पर घेरने से नहीं चूकी. इस मुद्दे को बाद में बीजेपी ने चुनावी मुद्दा भी बनाया.  


गहलोत का आत्मविश्वास और अंहाकर
राजस्थान चुनाव में हार की एक और वजह खुद सीएम अशोक गहलोत भी रहा. गहलोत का आत्मविश्वास और अंहाकर उन्हें ले डूबा. कई बार पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके ऊपर अहंकारी होने का इल्जाम लगाया था. साथ ही पार्टी के विधायकों ने भी बात नहीं सुनने का इल्जाम लगाया था. 


पेपर लीक का मामला पड़ा भारी 
हार का एक बड़ा कारण राजस्थान की भर्ती परीक्षा का पेपर लीक का भी रहा. बीजेपी ने इस मुद्दे को भी चुनावी जनसभाओं में खूब भुनाया. गहलोत सरकार को लेकर युवाओं में इस मुद्दे को लेकर काफी गुस्सा था, जिसे युवाओं ने चुनाव में बदला लिया.  


बता दें कि पिछले पांच सालों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने का मामला सामने आए. जो बाद में गहलोत पर भी भारी पड़ा.