Kisi ka Bhai Kisi Ki Jaan Movie Review: भाईजान के सारे फॉर्मूले फेल, अब ईद ही बचा सकती है 'किसी का भाई किसी की जान' को
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Kisi ka Bhai Kisi Ki Jaan Movie Review: भाईजान के सारे फॉर्मूले फेल, अब ईद ही बचा सकती है 'किसी का भाई किसी की जान' को

सलमान खान की मचअवेटेड फिल्म Kisi Ka Bhai Kisi Ki Jaan थियेटर में रिलीज हो गई है. अगर आपने ये फिल्म अभी तक नहीं देखी है और देखने का सोच रहे हैं तो जाने से पहले इस फिल्म का रिव्यू जरूर पढ़ लें.

किसी का भाई किसी की जान

निर्देशक: फरहाद शामजी

स्टार कास्ट: सलमान खान, पूजा हेगड़े, व्यंकटेश, जगपति बाबू, रोहिणी हट्टंगिणी, सतीश कौशिक आदि

स्टार रेटिंग: 2.5

सिर्फ भाईजान ही हैं 

काफी डरते डरते हुए डायरेक्टर फरहाद शामजी ने ये मूवी बनाई है कि कहीं कोई बायकॉट की मांग ना कर दे, लेकिन चूंकि ईद पर रिलीज करनी थी और मुस्लिम देशों से भी 'पठान' की ही तरह कमाई दिमाग में थी, सो फिल्म का हीरो है 'भाईजान'. उसका असली नाम बताया ही नहीं गया पठान की तरह. उसके भाइयों के नाम दिखाए इश्क, मोह और लव. शायद ही मस्जिद जाते दिखाया गया हो और ना ही नमाज पढ़ते. बल्कि हीरो भागवद गीता का श्लोक सुनाता है. सारे भाई जीसस की मूर्ति से मन्नत मांगते हैं, और हीरोइन चूंकि हिंदू है, इसलिए तिलक लगाए पूजा करते दिखते हैं. वंदेमातरम को केन्द्र में रखकर भी कुछ लाइनें दो तीन बार बोलते हैं सलमान. लेकिन मूवी का नाम भाईजान है, सो ईद पर जिनको देखनी है, वो तो आएंगे ही. लेकिन इसी 'डर' के चलते ये मूवी एकदम से चूं चूं का मुरब्बा बन गई है, साउथ के तड़के के साथ.

ये है कहानी
मूवी की कहानी चूंकि अजीत की तमिल मूवी 'वीरम' का रीमेक होने के चलते तय थी, सो वैसे ही आगे बढ़ती है. बस बिजनेस के ध्यान में रखते हुए भाईजान वाला एंगल डाल दिया गया है. भाई जरूर पांच की जगह चार हैं. भाईजान (सलमान) तीन अनाथों को अपने सगे भाई की तरह प्यार करते हैं, भाग्या (भाग्यश्री) से इसलिए प्यार नहीं कर पाते क्योंकि उसके भाई मुंबई जाने को तैयार नहीं. जब बड़े होकर तीनों अपनी-अपनी गर्लफ्रेंड से शादी करना चाहते हैं, तो भाईजान की शादी पहले करवाना चाहते हैं. लेकिन तब तक भाग्या की शादी हो चुकी थी, तो उसी नाम की दूसरी भाग्या (पूजा हेगड़े) ढूंढते हैं.

 

 

भाईजान को धीरे-धीरे उससे प्यार हो भी जाता है, लेकिन उसकी कहानी में उसका एक भाई (व्यंकटेश) है, जो हैदराबाद में रहता है और हैदराबाद का एक बड़ा गुंडा (जगपति बाबू) उसका सबसे बड़ा दुश्मन है. जब भाग्या पर हमला होता है, तो भाईजान बचाता है और तब कहानी खुलती है. जबकि भाईजान की बस्ती पर नजर रखने वाला (बॉक्सर विजेन्द्र) उसकी वजह से अब तक नाकामयाब है, जगपति की मदद से भाईजान को मारना चाहता है. कैसे भाईजान दोनों से निपटकर कहानी को सुखद अंत की तरफ ले जाता है, यही कहानी है.

जरूरत से ज्यादा फॉर्मूले
फरहाद शामजी खुद को ऑलराउंडर समझकर गीत लेखन से लेकर स्क्रिप्ट लेखन, म्यूजिक, गायकी और अब डायरेक्शन सबमें हाथ आजमाते रहे हैं, कहीं कही कामयाबी मिली है, सो ये समझते हैं कि फिल्म से पैसा कमाने के लिए सारे फॉरमूले अपनाने चाहिए. लेकिन जरूरत से ज्यादा फॉर्मूले कैसे मूवी का कबाड़ा कर देते हैं, उसके लिए ये मूवी देखी जानी चाहिए.

अपनाया गया पठान का फॉर्मूला
पहला फॉर्मूला पठान की तरह हीरो का नाम भाईजान रखकर उसका धर्म भी छुपा लेना, पठान से पहले इस फॉर्मूले को यशराज की ‘वॉर’ में आजमाया गया था, हृतिक के किरदार कबीर का धर्म छुपाकर. चूंकि भाइयों का भी मजहब छुपाना था, सो उनके नाम रख दिए गए इश्क, मोह और लव. उनकी गर्लफ्रेंड्स के नाम भी ऐसे ही रखे गए. अगर वीरम का रीमेक ही बनाना था, तो एक ही राज्य में कहानी होती, चेन्नई एक्सप्रेस की तरह साउथ और नॉर्थ का मिलन कर दिया गया. जगपति और व्यंकटेश के अलावा 2 मिनट के लिए एक गाने में रामचरण को भी लुंगी डांस करते दिखा दिया गया.

 

 

बॉयकॉट से बचने का नया पैंतरा
इतना ही नहीं राम बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना की तर्ज पर रामचरण एक डायलॉग भी बोलते हैं कि, ‘भाईजान की शादी में राम दीवाना’.एक सीन में तो भाईजान ने भी भागवद गीता का श्लोक पढ़ा है, राम का जिक्र राम से ही करवा दिया अबदुल्ला की जगह रखकर. ये सारे फॉर्मूले फिल्म को बायकॉट से बचाने या सेकुलर बनाने के लिए थे, कहीं लोग ईद वालों की ही मूवी ना समझ लें.

भाग्यश्री भी आईं नजर
एक और फॉर्मूला इस्तेमाल किया गया, सलमान की दो-दो हीरोइंस को इस मूवी में कैमियो रोल दिए गए. भाग्यश्री और भूमिका चावला. भाग्यश्री ने उनकी पुरानी प्रेमिका भाग्या का रोल किया है, जिसमें बाकायदा उनके पति हिमालय और बेटे अभि (मर्द को दर्द नहीं होता फेम) के भी डायलॉग्स हैं. इतना ही नहीं ‘मैंने प्यार किया’ की एक क्लिप भी चलाई गई, बाद मे भाग्यश्री मूवी का एक डायलॉग भी बोलती हैं कि ‘दोस्ती में नो सॉरी नो थैंक यू. लेकिन आपको ये पूरा सीन देखकर अजीब सा ही लगेगा क्योंकि भाग्यश्री को जहां अपने प्रेमी की शादी ना होने की वजह से उदास दिखना चाहिए था, वो बेहद खुश दिख रही थीं.

सितारों की लाइन, पर रोल ना के बराबर
‘तेरे नाम’की हीरोइन भूमिका चावला इस मूवी में व्यंकटेश की पत्नी के रोल में हैं, उनका कोई खास रोल नहीं है. खास रोल तो सतीश कौशिक, आसिफ खान (भाभी जी घर पर हैं कि विभूति जी), तेज सप्रू आदि के भी नहीं हैं. तीनों भाई और उनकी प्रेमिकाओं के रोल भी ज्यादा असर नहीं छोड़ते, ऐसे में पलक तिवारी, शहनाज गिल, जस्सी गिल, राघव जुयाल, सिद्दार्थ निगम आदि.

 

 

सलमान का सबसे खराब लुक
मूवी में कुछ और भी फॉर्मूले इस्तेमाल किए गए, सलमान आधे से ज्यादा मूवी में केजीएफ वाले यश जैसे लुक में रहते हैं, लम्बे बालों के साथ दाढ़ी में बूढ़े दिखते हैं सलमान, फिर थोड़ी देर तक बाल कटवाकर वो छोटी दाढ़ी में रहते हैं फिल्म के क्लाइमेक्स में वो फिर से क्लीन शेव हो जाते हैं. तब लगता है सलमान को क्लीन शेव ही रहना चाहिए था, लेकिन उसमें भी क्लोज शॉट्स आते ही उनका मुंह कुछ टेढ़ा सा दिखने लगता है. भले ही सलमान फैंस को रिझाने के लिए ये तीन लुक दिए गए हों लेकिन सच ये है कि उनका अब तक का सबसे खराब लुक इस मूवी में आया है. कभी-कभी तो लगता है सलमान उसी दौर से गुजर रहे हैं, जिससे कभी लाल बादशाह, जादूगर आदि के समय अमिताभ गुजरे थे.

बॉक्सर विजेन्द्र नहीं हुए फिट
कुछ और भी फॉर्मूले हैं इस मूवी में बॉक्सर विजेन्द्र को लीड विलेन के तौर पर उतार दिया गया है, हरिय़ाणवी में उन्होंने अपना पहला डायलॉग तो शानदार बोला है, लेकिन एक भोलापन सा उनके चेहरे पर दिखता है, जो विलेन को जंचता नहीं. वो लड़ते भी बॉक्सर की तरह ही हैं. व्यंकटेश के किरदार को भी पूरा स्पेस नहीं मिला है, जगपति बाबू जरूर शानदार लगे हैं. अभिमन्यु को इस मूवी में इस्तेमाल ही नहीं किया गया. चलते चलते भी हनी सिंह का रैप सोंग इस मूवी में डाल दिया गया है.

एक्शन सीन में है दम
फिल्म में गाने कई हैं, और सब तरह के हैं, लेकिन शायद एक भी यादगार होने नहीं जा रहा है. हालांकि सलमान के जबरा फैन्स को उनके एक्शन सीन काफी देखने को मिलेंगे, मेट्रो ट्रेन का एक एक्शन सीन अच्छे से फिल्माया गया है, लेकिन ‘पठान’ के आगे ये सब फीके ही साबित हुए हैं.

बिजनेस की बात करें तो ईद पर सलमान का काफी कुछ टिका हुआ है, साउथ के दर्शकों से भी उनको उम्मीदें हैं, लेकिन जिन लोगों ने वीरम देखी है, वो केवल इसलिए देखने आ सकते हैं कि कैसे रीमेक बनाया है, जी ने दिल्ली के सिंगल स्क्रीन में इसे रिलीज नहीं होने दिया है, तो बाकी की उम्मीद मुस्लिम देशों और ओटीटी से है. ऐसे में सलमान पैसे भले ही निकाल लें या कमाई भी कर लें, लेकिन फिल्म तारीख के लायक नहीं बनी है और एक्शन व एडीटिंग जिस तरह से ‘वांटेड’ में थी, उसके आगे ये कुछ भी नहीं हैं. सो सलमान को ध्यान में रखना होगा कि मूवी पूरे कनविक्शन के साथ बनाने की चीज हैं, ना कि किसी की कहानी, किसी का डर, किसी का फॉर्मूला, किसी का कैमियो, किसी का लुक लेकर ‘किसी का भाई किसी की जान बना दो’. 

 

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