गाजियाबाद: अंबेडकर प्रतिमा अदालत परिसर से हटाई गई, हड़ताल पर बैठे वकील

जिला प्रशासन ने यहां अदालत परिसर से संविधान निर्माता बाबासाहब भीमराव अंबेडकर की एक प्रतिमा हटा दी.

गाजियाबाद: अंबेडकर प्रतिमा अदालत परिसर से हटाई गई, हड़ताल पर बैठे वकील
एसोसिएशन ने नववर्ष की पूर्व संध्या पर अदालत परिसर के भीतर कांस्य की प्रतिमा लगाई थी.(फाइल फोटो)

गाजियाबाद: जिला प्रशासन ने यहां अदालत परिसर से संविधान निर्माता बाबासाहब भीमराव अंबेडकर की एक प्रतिमा हटा दी. इसको लेकर गाजियाबाद बार एसोसिएशन ने रोष जाहिर किया है. एसोसिएशन ने नववर्ष की पूर्व संध्या पर अदालत परिसर के भीतर कांस्य की प्रतिमा लगाई थी.

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश त्यागी काकड़ा ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने जबरन प्रतिमा हटा दी है. जिले के अनेक वकील इस कदम के खिलाफ आज हड़ताल पर बैठे. काकड़ा ने कहा कि अगर प्रतिमा को पुन:स्थापित नहीं किया गया तो गाजियाबाद जिले के वकीलों के साथ-साथ हापुड़, गौतमबुद्धनगर जिलों के भी उनके समकक्ष काम पर नहीं आएंगे.

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बाबा साहब की 10 बातें जो किसी भी समाज में ला सकती हैं बदलाव
विधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर (Bhim Rao Ambedkar) की पुण्यतिथि पर उन्हें याद कर रहा है. भारत रत्न अंबेडकर की मौत 6 दिसंबर 1956 को हुई थी. महान दलित चिंतक अंबेडकर भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं. उन्होंने उस दौर में भारतीय समाज और संस्कृति का अध्यन कर ऐसी बातें कही थीं जो बिल्कुल सटीक हैं. आइए भारत के इस महान शख्स की पुण्यतिथि पर उनकी कही उन 10 बातों को याद करें जो किसी के भी जीवन में प्रेरणा दे सकते हैं.

1. शिक्षित बनो! संगठित रहो! संघर्ष करो.
2. मैं ऐसे धर्म को मानता हूं जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है.
3. जीवन लंबा होने के बजाय महान होना चाहिए.
4. एक महान व्यक्ति एक प्रतिष्ठित व्यक्ति से अलग है, क्योंकि वह समाज का सेवक बनने के लिए तैयार रहता है.
5. दिमाग का विकास मानव अस्तित्व का परम लक्ष्य होना चाहिए.
6. हम सबसे पहले और अंत में भारतीय हैं.
7. हिंदू धर्म में विवेक, कारण और स्वतंत्र सोच के विकास के लिए कोई गुंजाइश नहीं है.
8. मनुष्य नश्वर है. ऐसे विचार होते हैं. एक विचार को प्रचार-प्रसार की ज़रूरत है जैसे एक पौधे में पानी की ज़रूरत होती है. अन्यथा दोनों मुरझा जायेंगे और मर जायेंगे.
9. मैं एक समुदाय की प्रगति का माप महिलाओं द्वारा हासिल प्रगति की डिग्री द्वारा करता हूं.
10. इतिहास बताता है कि जहां नैतिकता और अर्थशास्त्र में संघर्ष होता है वहां जीत हमेशा अर्थशास्त्र की होती है. निहित स्वार्थों को स्वेच्छा से कभी नहीं छोड़ा गया है जब तक कि पर्याप्त बल लगा कर मजबूर न किया गया हो.

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